राजगीर में आज से शुरू हो रहा मलमास मेला एक बार फिर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने जा रहा है। बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में लगने वाला मलमास मेला वैदिक परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम माना जाता है। रविवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार, तीर्थ पूजन और देवी-देवताओं के आह्वान के साथ मेले का विधिवत शुभारंभ होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस विश्व प्रसिद्ध मेले का उद्घाटन करेंगे।
मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास के दौरान 33 कोटि देवी-देवता एक महीने तक राजगीर में निवास करते हैं। इसी वजह से इस मेले को सनातन आस्था का महाकुंभ भी कहा जाता है। यह मेला 15 जून तक चलेगा।
वैदिक अनुष्ठान के साथ होगा भव्य शुभारंभ
श्रीराजगृह तीर्थ रक्षार्थ पंडा समिति के अनुसार रविवार सुबह साढ़े छह बजे से तीर्थ पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे।
परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज सुबह 9 बजे ध्वजारोहण करेंगे। इसके बाद मेले का आधिकारिक आगाज होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सुबह 9:20 बजे कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
मलमास मेले की सबसे खास बात यह है कि इस अवधि में राजगीर को छोड़कर अन्य स्थानों पर शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। यही वजह है कि देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
लाखों श्रद्धालुओं के लिए अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन को अनुमान है कि मेले में प्रतिदिन चार से पांच लाख श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। वहीं शाही स्नान के दिनों में यह संख्या सात से आठ लाख तक पहुंचने की संभावना है।
इसी को देखते हुए पूरे राजगीर को हाई सिक्योरिटी जोन में बदल दिया गया है। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए 950 दंडाधिकारी और 530 से अधिक पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है।
इसके अलावा 100 होमगार्ड जवान, घुड़सवार पुलिस बल और विशेष निगरानी टीमें भी अलर्ट मोड में रहेंगी। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ाई है।
ड्रोन और 550 सीसीटीवी से होगी निगरानी
मेला क्षेत्र में सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। पूरे इलाके में 550 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।
आसमान से ड्रोन कैमरे निगरानी करेंगे, जबकि जमीन पर 38 टीओपी और 16 वॉच टावर से भीड़ की मॉनिटरिंग होगी।
मेला थाना मैदान में केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। यहां से पुलिस, स्वास्थ्य, बिजली और अग्निशमन विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे।
श्रद्धालुओं के लिए ठहरने और भोजन की खास व्यवस्था
इस बार प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया है। राजगीर में 14 स्थानों पर अस्थायी आश्रय स्थल बनाए गए हैं।
इनमें 11 जगह जर्मन हैंगर और तीन स्थानों पर वाटरप्रूफ पंडाल तैयार किए गए हैं। यहां श्रद्धालुओं को नि:शुल्क ठहरने की सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा स्टेट गेस्ट हाउस में टेंट सिटी भी तैयार की गई है। राजगीर के प्रमुख मार्गों और प्रवेश द्वारों को रंग-बिरंगी रोशनी और तोरणद्वारों से सजाया गया है।
‘दीदी की रसोई’ में 35 रुपये में मिलेगा भोजन
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन की भी विशेष व्यवस्था की गई है। 14 स्थानों पर ‘दीदी की रसोई’ शुरू की गई है, जहां सिर्फ 35 रुपये में भरपेट भोजन मिलेगा।
जीविका समूह की महिलाएं इस व्यवस्था का संचालन करेंगी। वहीं राजगीर के बड़े होटलों में अलग-अलग कीमतों पर विशेष व्यंजन भी उपलब्ध रहेंगे।
धर्मशालाओं और होटलों में श्रद्धालुओं के लिए कमरे बुक किए गए हैं। सुविधाओं के अनुसार किराया तय किया गया है।
पेयजल, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष फोकस
प्रशासन ने पेयजल और स्वच्छता को लेकर भी व्यापक तैयारी की है। मेला क्षेत्र के 30 स्थानों पर 300 प्याऊ लगाए गए हैं, जहां गंगाजल उपलब्ध कराया जाएगा।
20 नए चापाकल लगाए गए हैं, जबकि 60 खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 125 स्टैंड पोस्ट भी बनाए गए हैं।
डीएम कुंदन कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चिकित्सा, सफाई, रोशनी और संचार व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष प्लान
मेले में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की भी तैयारी की है। भगदड़, आग लगने या कुंड में जल दुर्घटना जैसी स्थिति से निपटने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस और प्रशासनिक टीमों को लगातार गश्त करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करेंगे ताकि मेला शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
