पूर्णिया सांसद पप्पू यादव सुरक्षा मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। पप्पू यादव सुरक्षा मामला में सांसद ने अपनी सुरक्षा को ‘वाई’ से बढ़ाकर ‘जेड’ श्रेणी करने की मांग की है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सीधे फैसला देने के बजाय उन्हें पटना हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले पर पहले से लंबित याचिका पर वहीं सुनवाई कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं दिया सीधा आदेश?
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप से इनकार किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि जब मामला पहले से ही पटना हाईकोर्ट में लंबित है, तो वहीं इस पर सुनवाई होनी चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उचित मंच पर ही मामले का समाधान बेहतर तरीके से हो सकता है।
पटना हाईकोर्ट में लंबित है याचिका
पप्पू यादव की सुरक्षा बढ़ाने से जुड़ी याचिका पहले से पटना हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट ने 19 नवंबर 2024 को नोटिस जारी किया था, लेकिन इसके बाद सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
यही वजह रही कि सांसद को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से खतरे का दावा
सुनवाई के दौरान पप्पू यादव के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से धमकियां मिल रही हैं।
इसी कारण उनकी सुरक्षा को बढ़ाने की मांग की गई है।
अदालत ने इस पर सवाल करते हुए पूछा कि क्या उनके पास निजी सुरक्षा व्यवस्था है, जिस पर जवाब ‘ना’ में दिया गया।
‘वाई प्लस’ सुरक्षा पर भी उठे सवाल
सुनवाई में यह भी सामने आया कि पप्पू यादव को पहले ‘वाई प्लस’ सुरक्षा दी गई थी।
लेकिन यह सुरक्षा जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं रही और सिर्फ कागजों तक सीमित बताई गई।
इस बिंदु ने सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘वाई’ और ‘जेड’ सुरक्षा में क्या अंतर?
सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, ‘वाई’ श्रेणी में करीब 11 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं।
वहीं ‘जेड’ श्रेणी में सुरक्षा का दायरा बड़ा होता है, जिसमें करीब 22 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं।
इसमें एस्कॉर्ट, पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर और अन्य सुरक्षात्मक व्यवस्थाएं भी होती हैं।
कोर्ट की टिप्पणी और आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटना हाईकोर्ट इस मामले को गंभीरता से लेगा और उचित निर्णय देगा।
अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे हाईकोर्ट में अपनी लंबित याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग करें।
अब इस मामले की अगली दिशा पटना हाईकोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगी।
राजनीतिक और सुरक्षा दोनों पहलुओं पर नजर
यह मामला केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था से भी जुड़ा है।
राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है।
आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही और सरकार के फैसले इस मामले की दिशा तय करेंगे।
क्यों अहम है यह मामला?
बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और राजनीतिक नेताओं को मिल रही धमकियों के बीच यह मामला महत्वपूर्ण हो जाता है।
यह तय करेगा कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह मजबूत किया जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि अदालतें ऐसे मामलों में किस स्तर तक हस्तक्षेप करती हैं।
