खगड़िया में सरकारी पोखर अतिक्रमण पर सख्ती, जांच के आदेश जारी

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


 

धोबिया खड़ा अतिक्रमण मामला अब खगड़िया प्रशासन के लिए गंभीर विषय बन गया है। धोबिया खड़ा अतिक्रमण मामला सामने आने के बाद अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने सरकारी पोखर और सड़क पर कथित कब्जे की जांच के आदेश जारी किए हैं। मामला नगर परिषद क्षेत्र के संसारपुर वार्ड संख्या 38 से जुड़ा है, जहां स्थानीय लोगों ने वर्षों पुराने सरकारी पोखर और रास्ते पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है। प्रशासन ने साफ किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों को गोपनीय तरीके से जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया। प्रशासन के इस रुख के बाद स्थानीय लोगों में कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।

सरकारी पोखर पर कब्जे का आरोप

शिकायतकर्ता दीपक Kumar ने आरोप लगाया कि लगभग 4 से 5 बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि “धोबिया खड़ा” नाम का यह पोखर वर्षों पुराना है और धीरे-धीरे उसका अस्तित्व खत्म होता जा रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जहां पहले सार्वजनिक रास्ता हुआ करता था, वहां अब गोबर, कचरा और गंदगी जमा कर दी गई है। इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि अतिक्रमण की वजह से इलाके की सफाई व्यवस्था और जल निकासी भी प्रभावित हो रही है। बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

प्रशासन ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विवेक सुगंध ने मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों को विस्तृत जांच का निर्देश दिया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों से सरकारी पोखर पर अतिक्रमण कैसे जारी रहा। साथ ही स्वर्गीय ब्रह्मदेव चौधरी के घर तक जाने वाले रास्ते को बंद किए जाने के कारणों की भी जानकारी मांगी गई है।

पदाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि पूरे मामले में शामिल लोगों की पहचान कर रिपोर्ट सौंपी जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

“अगर पोखर है तो उसे बहाल किया जाएगा”

सुनवाई के दौरान विवेक सुगंध ने साफ शब्दों में कहा कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में पोखर दर्ज है तो उसका अस्तित्व हर हाल में बहाल किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “अगर पोखर है तो वह बनेगा, उसे कोई नहीं रोक सकता।” प्रशासन के इस बयान के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पोखरों का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण और भूजल स्तर बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।

स्थानीय लोगों को हो रही परेशानी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पोखर और सड़क पर अतिक्रमण की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। कई लोगों को रास्ता बदलकर आवागमन करना पड़ रहा है।

गांव के बुजुर्गों के अनुसार, यह पोखर पहले इलाके की पहचान हुआ करता था। यहां आसपास के लोग पानी का उपयोग करते थे और बरसात में जलभराव की समस्या भी कम रहती थी।

अब धीरे-धीरे पोखर के आसपास कचरा जमा होने और कब्जे की शिकायतों से लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करे।

5 जून को होगी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 5 जून 2026 को तय की गई है। इस दौरान अंचल अधिकारी को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि सरकारी जमीन और पोखर पर कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

स्थानीय लोगों की नजर अब अगली सुनवाई पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में ठोस कार्रवाई करेगा और सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा है मामला

विशेषज्ञों के अनुसार, गांवों और कस्बों में पुराने पोखर केवल जल स्रोत नहीं होते, बल्कि स्थानीय पर्यावरण संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा भी होते हैं।

पोखरों के खत्म होने से जल संरक्षण, भूजल स्तर और वर्षा जल संचयन पर असर पड़ता है। यही कारण है कि सरकारी जमीन और जल स्रोतों को बचाने की मांग लगातार उठती रही है।

धोबिया खड़ा पोखर का मामला अब केवल जमीन विवाद नहीं, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक हित से जुड़ा मुद्दा भी बन गया है।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1