तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति भी गर्मा गई है। विजय के मुख्यमंत्री बनने और कांग्रेस के समर्थन को लेकर बिहार में भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर तीखे सवाल उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विजय के मुख्यमंत्री बनने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों को निशाने पर लिया। वहीं बिहार में परिवारवाद और भ्रष्टाचार को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति में परिवारवाद और राजनीतिक विरासत पर नई बहस शुरू हो गई है।
रविवार को तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विजय की पार्टी को कांग्रेस के समर्थन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिस तरह कई दलों के साथ जुड़ी, वहां भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए।
गिरिराज सिंह ने कहा कि विजय की पार्टी को भी कांग्रेस “भ्रष्टाचार के दलदल” में धकेल देगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
हालांकि कांग्रेस या टीवीके की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत की राजनीति में हुए इस बड़े बदलाव का असर दूसरे राज्यों की राजनीतिक बयानबाजी में भी दिखाई देने लगा है।
तेजस्वी यादव पर भी बोले गिरिराज सिंह
गिरिराज सिंह ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी निशाने पर लिया।
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को दूसरों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने राजनीतिक परिवार और उस पर लगे आरोपों को देखना चाहिए।
गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि लालू परिवार लंबे समय से भ्रष्टाचार के मामलों में घिरा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
उनके मुताबिक नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।
परिवारवाद की बहस फिर तेज
बिहार में हाल के दिनों में परिवारवाद का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
निशांत कुमार के मंत्री बनने के बाद विपक्ष ने एनडीए सरकार पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में भाजपा और जेडीयू नेताओं ने राजद पर पलटवार शुरू किया।
अब विजय के मुख्यमंत्री बनने और विपक्षी गठबंधन की राजनीति के बीच परिवारवाद बनाम योग्यता की बहस और तेज होती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा लंबे समय तक राजनीतिक एजेंडे में बना रह सकता है।
संजय सरावगी ने लालू परिवार पर साधा निशाना
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी तेजस्वी यादव के बयान पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव बिना सोचे-समझे बयान देते हैं। सरावगी ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के राजनीतिक दौर का उदाहरण देते हुए विपक्ष पर परिवार आधारित राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि लालू यादव के जेल जाने के बाद राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया। बाद में तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को भी अहम राजनीतिक जिम्मेदारियां दी गईं।
संजय सरावगी ने कहा कि मीसा भारती को भी चुनावी राजनीति में आगे बढ़ाया गया। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह परिवार आधारित राजनीति का उदाहरण है।
निशांत कुमार को लेकर भाजपा का बचाव
संजय सरावगी ने निशांत कुमार का बचाव करते हुए कहा कि वह पढ़े-लिखे इंजीनियर हैं और अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि निशांत कुमार खुद अपना राजनीतिक रास्ता बना रहे हैं और उन्हें केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
भाजपा नेताओं का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी क्षमता और काम के आधार पर अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि राजनीतिक परिवारों से जुड़े लोगों को सत्ता और संगठन में जल्दी जगह मिल जाती है।
बिहार की राजनीति में बयानबाजी का दौर जारी
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज हो सकता है।
परिवारवाद, भ्रष्टाचार और नई पीढ़ी के नेतृत्व जैसे मुद्दे आने वाले महीनों में भी राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहेंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जनता अब नेताओं के बयानों के साथ-साथ उनके काम और प्रशासनिक प्रदर्शन पर भी नजर रख रही है।
