पटना में CM हाउस नाम बदलने का बड़ा फैसला सामने आया है। पटना में CM हाउस नाम बदलने के तहत अब मुख्यमंत्री आवास को ‘लोक सेवक आवास’ कहा जाएगा। सम्राट चौधरी सरकार ने यह निर्णय लेते हुए साफ संकेत दिया है कि सरकार खुद को जनता का सेवक मानती है। इस फैसले के बाद दशकों से ‘एक अणे मार्ग’ के नाम से पहचाना जाने वाला आवास अब नई पहचान के साथ जाना जाएगा।
यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और प्रशासनिक स्तर पर इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
क्या है ‘लोक सेवक आवास’ नाम बदलने का मकसद?
सरकार के मुताबिक, इस नाम परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य जनता से जुड़ाव को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मानना है कि सरकार को जनता का सेवक बनकर काम करना चाहिए। इसी सोच को दर्शाने के लिए CM हाउस का नाम बदलकर ‘लोक सेवक आवास’ रखा गया है।
यह कदम प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी देता है कि सरकार जनहित को प्राथमिकता दे रही है।
‘एक अणे मार्ग’ से नई पहचान तक
पटना का ‘एक अणे मार्ग’ स्थित सरकारी बंगला लंबे समय से मुख्यमंत्री आवास के रूप में जाना जाता रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करीब 20 साल तक इसी आवास में रहे। हाल ही में उन्होंने पद छोड़ने के बाद यह आवास खाली कर दिया।
अब इस ऐतिहासिक बंगले को नई पहचान दी गई है, जिससे यह प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से फिर चर्चा में आ गया है।
आवास का दायरा भी बढ़ाया गया
नाम बदलने के साथ-साथ मुख्यमंत्री आवास का दायरा भी बढ़ाया गया है।
भवन निर्माण विभाग ने ‘एक अणे मार्ग’ के साथ-साथ ‘5 देशरत्न मार्ग’ स्थित बंगले को भी इसमें शामिल कर लिया है।
इस विस्तार से मुख्यमंत्री आवास की प्रशासनिक क्षमता और सुविधाओं में वृद्धि होने की उम्मीद है।
अभी कहां रह रहे हैं मुख्यमंत्री?
फिलहाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ‘5 देशरत्न मार्ग’ स्थित आवास में रह रहे हैं।
उन्हें यह आवास 2024 में डिप्टी सीएम रहते आवंटित किया गया था और अभी यहीं से मुख्यमंत्री कार्यालय का कामकाज चल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, शुभ मुहूर्त के बाद ही वे ‘लोक सेवक आवास’ में शिफ्ट होंगे।
पहले भी बदले जा चुके हैं सरकारी आवासों के नाम
सरकारी आवासों के नाम बदलने की यह परंपरा नई नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नई दिल्ली में ‘7 रेसकोर्स रोड’ का नाम बदलकर ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ कर दिया था।
इसी तरह कई राज्यों में ‘राजभवन’ का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ रखा गया है, ताकि जनता के प्रति जवाबदेही का संदेश दिया जा सके।
राजनीतिक और प्रशासनिक मायने
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है।
यह एक राजनीतिक संदेश भी है, जिसमें सरकार अपनी छवि को जनसेवक के रूप में पेश करना चाहती है।
इसके साथ ही यह बदलाव प्रशासनिक कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देने का संकेत देता है।
