बिहार टीचर ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। बिहार टीचर ट्रांसफर पॉलिसी के तहत अब महिला शिक्षकों को उनके घर के नजदीक स्कूलों में पोस्टिंग देने की तैयारी हो रही है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के बाद कहा कि शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाया जाएगा। नई नीति में पुरुष शिक्षकों को भी गृह प्रखंड के आसपास ट्रांसफर की सुविधा मिल सकती है।
इस घोषणा के बाद राज्य के लाखों शिक्षकों और अभ्यर्थियों के बीच नई ट्रांसफर नीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि पिछली नीति की कमियों को दूर कर संतुलित और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाएगी।
महिला शिक्षकों को घर के पास मिलेगी पोस्टिंग
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला शिक्षकों को यथासंभव उनके गृह जिले के गृह प्रखंड या गृह पंचायत के आसपास के स्कूलों में पोस्टिंग दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे महिला शिक्षकों को पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर बड़ी राहत मिलेगी। लंबे समय से महिला शिक्षक घर से दूर पोस्टिंग को लेकर परेशान थीं।
नई नीति में इस बात पर जोर रहेगा कि शिक्षिकाओं को अनावश्यक दूरी तय न करनी पड़े। इससे स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति भी बेहतर हो सकती है।
पुरुष शिक्षकों को भी मिलेगी राहत
सरकार केवल महिला शिक्षकों तक सीमित नहीं रहना चाहती। नई नीति में पुरुष शिक्षकों के लिए भी राहत का प्रावधान तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पुरुष शिक्षकों को उनके गृह जिले के बगल वाले प्रखंडों में ट्रांसफर का अवसर दिया जाए। इससे लंबे समय से एक ही जगह पर कार्यरत शिक्षकों को सुविधा मिल सकती है।
शिक्षक संगठनों ने भी लंबे समय से ऐसी नीति की मांग उठाई थी, जिसमें पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।
क्यों बदली जा रही है पुरानी ट्रांसफर नीति?
बिहार में पिछली सरकार के दौरान शिक्षकों के ऐच्छिक तबादले की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लाखों शिक्षकों से मनचाही पोस्टिंग के लिए आवेदन लिए गए थे।
हालांकि बाद में शिक्षा विभाग की समीक्षा में कई समस्याएं सामने आईं। कुछ स्कूलों में एक ही विषय के कई शिक्षक पहुंच गए, जबकि कई स्कूलों में पद खाली रह गए।
इस असंतुलन का असर सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा। कई जगह गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों के शिक्षक नहीं मिले, जबकि अन्य स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक तैनात हो गए।
इन्हीं कमियों को देखते हुए अब सरकार नई और संतुलित ट्रांसफर पॉलिसी तैयार कर रही है।
फिलहाल ट्रांसफर प्रक्रिया पर लगी है रोक
राज्य सरकार ने कुछ समय पहले शिक्षकों के ट्रांसफर पर अस्थायी रोक लगा दी थी। शिक्षा विभाग का कहना था कि मौजूदा नीति में कई तकनीकी और प्रशासनिक खामियां हैं।
अब नई पॉलिसी बनने के बाद ही ऐच्छिक तबादले की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। माना जा रहा है कि सरकार इस बार शिक्षक संघों, शिक्षा विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों से सुझाव लेने के बाद अंतिम नीति लागू करेगी।
इससे भविष्य में ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर विवाद और असंतुलन कम करने की कोशिश होगी।
बिहार में 5 लाख से ज्यादा शिक्षक
फिलहाल बिहार में सरकारी शिक्षकों की संख्या 5 लाख से अधिक बताई जा रही है। इतने बड़े शिक्षा तंत्र में ट्रांसफर नीति का असर सीधे स्कूलों की व्यवस्था पर पड़ता है।
इसी बीच मुख्यमंत्री ने अगले पांच वर्षों में एक लाख नए शिक्षकों की भर्ती का भी ऐलान किया है। सरकार हर साल करीब 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति करने की योजना बना रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि नई भर्ती और नई ट्रांसफर नीति को साथ लागू करने से स्कूलों में शिक्षकों का संतुलन बेहतर किया जा सकता है।
नई नीति से क्या बदल सकता है?
नई टीचर ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने के बाद कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
- महिला शिक्षकों को घर के पास पोस्टिंग मिल सकती है
- पुरुष शिक्षकों को भी नजदीकी प्रखंड में ट्रांसफर का मौका मिलेगा
- विषयवार शिक्षकों का संतुलन बेहतर हो सकता है
- स्कूलों में खाली पदों की समस्या कम हो सकती है
- ट्रांसफर प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकती है
सरकार अब ऐसी नीति तैयार करना चाहती है जिसमें शिक्षकों की सुविधा और छात्रों की पढ़ाई, दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
