बिहार में ठेकेदार पर SVU का बड़ा एक्शन, फ्लैट से सोना-नकदी बरामद

 


बिहार में सरकारी ठेकों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। बिहार SVU कार्रवाई के तहत पटना के मीठापुर स्थित ठेकेदार रिशु श्री के फ्लैट पर छापेमारी की गई, जहां से भारी मात्रा में संपत्ति और दस्तावेज बरामद हुए। बिहार SVU कार्रवाई के दौरान जांच टीम को करीब दो करोड़ रुपये मूल्य का सोना, चांदी, हीरा, नकदी और कई अहम कागजात मिले हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य के ठेकेदारी नेटवर्क और कुछ अधिकारियों के बीच कथित संबंधों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

विशेष निगरानी इकाई (SVU) की इस कार्रवाई को राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच एजेंसी अब इस मामले में जुड़े अन्य लोगों और संपत्तियों की भी जानकारी जुटा रही है।

फ्लैट से मिले 61 सेल डीड और कीमती सामान

एसवीयू की टीम ने पटना के मीठापुर इलाके में स्थित रिशु श्री के फ्लैट की गहन तलाशी ली। जांच के दौरान अधिकारियों को 61 सेल डीड से जुड़े दस्तावेज मिले, जिनकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है।

इसके अलावा करीब सवा किलो सोना, चांदी और हीरे के आभूषण भी बरामद किए गए। टीम को ढाई लाख रुपये नकद भी मिले हैं। जांच एजेंसियां अब इन संपत्तियों के स्रोत और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आ सके।

सरकारी टेंडर में हेरफेर का आरोप

रिशु श्री पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी निविदाओं में हेरफेर कर अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस प्रक्रिया से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा।

एसवीयू ने 30 अप्रैल 2025 को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस का नाम भी सामने आया है।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि किन विभागों में ठेकों के दौरान अनियमितताएं हुईं और किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही।

पहले ED भी कर चुकी है छापेमारी

इस मामले में सबसे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की थी। नवंबर 2025 में ईडी ने रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी कर 51 लाख रुपये नकद और करीब दो करोड़ रुपये मूल्य का सोना बरामद किया था।

ईडी को उस समय भी 61 सेल डीड के दस्तावेज मिले थे। जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच करते हुए कई वित्तीय लेन-देन को संदिग्ध माना था।

ईडी की रिपोर्ट और सिफारिश के आधार पर बाद में एसवीयू ने भी अलग से मामला दर्ज किया और विस्तृत जांच शुरू की।

कई विभागों में ठेके लेने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार रिशु श्री ने जल संसाधन, नगर विकास और भवन निर्माण विभाग समेत कई सरकारी विभागों में ठेके हासिल किए।

आरोप है कि अधिकारियों के साथ करीबी संबंधों का फायदा उठाकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। कुछ अधिकारियों को कथित तौर पर विदेश यात्राएं कराने और निजी खर्च मैनेज करने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल एजेंसियां दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही हैं।

डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल

एसवीयू की टीम अब वित्तीय लेन-देन, कंपनियों के दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे पूरे नेटवर्क और कथित रैकेट की संरचना समझने में मदद मिलेगी।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं और सरकारी राशि के उपयोग में क्या गड़बड़ियां सामने आईं।

कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद की गई इस कार्रवाई को बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों पर बड़ी जांच माना जा रहा है।

बिहार में बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल

इस मामले के सामने आने के बाद बिहार के प्रशासनिक और ठेकेदारी महकमे में हलचल बढ़ गई है। कई विभागों में पुराने टेंडर और वित्तीय मंजूरियों की भी समीक्षा की चर्चा शुरू हो गई है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह मामला राज्य की टेंडर प्रणाली और निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।

फिलहाल जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे संभव माने जा रहे हैं।

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