पेट्रोल-डीजल बचाने को बिहार सरकार का बड़ा कदम, सम्राट ने सबका काफिला घटाया


 

पेट्रोल-डीजल बचाने को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम करने का फैसला लिया है। पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए राज्य सरकार ने कई नई पहल शुरू की हैं, जिनमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बढ़ाना और ‘नो व्हीकल डे’ जैसे कदम शामिल हैं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण ईंधन की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की अपील की थी।

मुख्यमंत्री ने घटाया अपने काफिले का आकार

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने ईंधन बचत को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

सबसे पहले मुख्यमंत्री कारकेड में वाहनों की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने मंत्रियों, निगम-बोर्ड के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी अतिरिक्त वाहन के इस्तेमाल से बचने की अपील की है।

सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे कदमों से ईंधन की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जोर

राज्य सरकार ने लोगों से मेट्रो, बस, ऑटो और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का अधिक उपयोग करने की अपील की है।

इसके साथ ही सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि जहां संभव हो, बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की जाएं। इससे यात्रा कम होगी और ईंधन की बचत होगी।

सरकार ने सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम संस्कृति को बढ़ावा देने की सलाह भी दी है। अधिकारियों का कहना है कि इससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

‘नो व्हीकल डे’ की अपील

बिहार सरकार ने लोगों से सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की भी अपील की है। इसका उद्देश्य लोगों को ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

विशेषज्ञों का मानना है that अगर लोग सप्ताह में एक दिन निजी वाहन का उपयोग कम करें तो ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

इसके अलावा सरकारी कैंटीनों में पाम ऑयल के कम इस्तेमाल का निर्देश भी जारी किया गया है। इसे वैश्विक संकट के बीच संसाधनों की बचत से जोड़कर देखा जा रहा है।

औरंगाबाद के जिला जज की पहल बनी चर्चा का विषय

प्रधानमंत्री की अपील के बाद बिहार के औरंगाबाद जिले से भी एक अलग तस्वीर सामने आई। औरंगाबाद के प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार बुधवार सुबह साइकिल से अदालत पहुंचे।

उन्होंने अपने सरकारी आवास से व्यवहार न्यायालय तक करीब दो किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय की। इस दौरान उनके अंगरक्षक भी साइकिल से उनके साथ रहे।

जिला जज ने यह संदेश देने की कोशिश की कि ईंधन बचाने की जिम्मेदारी केवल आम जनता की नहीं, बल्कि प्रशासन और न्यायपालिका की भी है।

शहर में हो रही पहल की सराहना

प्रधान जिला जज की इस पहल की शहर में काफी चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों ने इसे सकारात्मक संदेश बताया है।

लोगों का कहना है कि जब उच्च पदों पर बैठे लोग खुद उदाहरण पेश करते हैं तो उसका असर समाज पर तेजी से पड़ता है।

पर्यावरण विशेषज्ञ भी मानते हैं कि छोटे स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास लंबे समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

पीएम मोदी ने भी की थी अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हैदराबाद दौरे के दौरान देशवासियों से पेट्रोल-डीजल और सोने की खपत कम करने की अपील की थी।

उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और अनावश्यक यात्रा से बचने की भी सलाह दी थी। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री के आधिकारिक काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात एसपीजी को काफिले की कारों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक कटौती करने का निर्देश दिया गया है।

ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी चिंता

वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और ईंधन कीमतों में संभावित बढ़ोतरी ने सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में ईंधन बचत और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर राज्यों की सक्रियता बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम और इलेक्ट्रिक वाहनों को लगातार बढ़ावा दिया जाए तो आने वाले वर्षों में ऊर्जा संकट के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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