बिहार में पंचायत सचिवों का महाधरना तेज, निलंबन के खिलाफ बढ़ा विरोध

 


बिहार में पंचायत सचिवों का आंदोलन तेज, 20 मई तक जारी रहेगा महाधरना

बिहार में पंचायत सचिव अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। राजधानी पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पंचायत सचिव दूसरे दिन भी डटे रहे। बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के आह्वान पर चल रहे इस महाधरना ने अब राज्य स्तर पर बड़ा रूप ले लिया है।

संघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को कमजोर करने के लिए कई जिलों के पंचायत सचिवों को निलंबित कर रही है। हालांकि आंदोलनकारियों का कहना है कि इससे उनका विरोध और मजबूत हुआ है। धरना 20 मई तक जारी रहने की घोषणा की गई है।

निलंबित पंचायत सचिवों को मंच पर किया गया सम्मानित

धरना के दूसरे दिन संघ के अध्यक्ष बीरेंद्र कुमार ने निलंबित पंचायत सचिवों को माला पहनाकर सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि समस्तीपुर, मधुबनी, दरभंगा, वैशाली, सिवान और गोपालगंज समेत कई जिलों में पंचायत सचिवों पर कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद आंदोलन में शामिल कर्मचारियों का मनोबल कम नहीं हुआ है।

संघ का कहना है कि निलंबन की कार्रवाई कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए की जा रही है। वहीं आंदोलनकारी इसे अपने संघर्ष की मजबूती के रूप में देख रहे हैं।

पांच मांगों को लेकर अड़े पंचायत सचिव

पंचायत सचिव संघ ने साफ कहा है कि जब तक उनकी पांच सूत्री मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

संघ के नेता राकेश रंजन ने कहा कि राज्य के सभी 38 जिलों के पंचायत सचिव आंदोलन के समर्थन में हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अब निलंबन से डरने वाले नहीं हैं।

संघ की प्रमुख मांगों में जिलास्तरीय स्थानांतरण लागू करना, शैक्षणिक योग्यता स्नातक करना और यात्रा भत्ता बढ़ाना शामिल है।

क्या हैं पंचायत सचिवों की पांच प्रमुख मांगें?

पंचायत सचिव संघ की ओर से सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं।

  • जिलास्तरीय स्थानांतरण व्यवस्था लागू की जाए
  • पंचायत सचिवों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक तय की जाए
  • यात्रा भत्ता बढ़ाकर 2000 रुपये किया जाए
  • ग्रेड पे 4200 रुपये निर्धारित किया जाए
  • 55 वर्ष से अधिक उम्र वाले पंचायत सचिवों की प्रोन्नति रोकने का आदेश वापस लिया जाए

संघ का कहना है कि ये मांगें लंबे समय से लंबित हैं और इन्हें लेकर कई बार विभाग को ज्ञापन भी दिया जा चुका है।

ग्रामीण इलाकों में कई सेवाएं प्रभावित

पंचायत सचिवों की हड़ताल का असर अब ग्रामीण प्रशासनिक कार्यों पर भी दिखने लगा है।

पंचायत सचिव ग्राम पंचायत और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। पंचायत बैठकों का आयोजन, सरकारी योजनाओं का संचालन और रिकॉर्ड संधारण जैसे कई अहम कार्य उनकी जिम्मेदारी में आते हैं।

मनरेगा, आवास योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी भी पंचायत सचिवों के जरिए होती है। ऐसे में लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने पर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र और योजनाओं पर असर

ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण जैसे काम भी पंचायत सचिवों के माध्यम से पूरे होते हैं।

इसके अलावा लाभुकों की सूची तैयार करना, पंचायत निधि का हिसाब रखना और सरकारी विभागों से समन्वय करना भी उनकी जिम्मेदारी में शामिल है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हड़ताल लंबी चली तो प्रमाणपत्र बनवाने और योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत बढ़ सकती है।

आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

धरना में शामिल नेताओं ने कहा कि यदि सरकार जल्द बातचीत नहीं करती है तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है।

महासंघ के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिंह समेत कई नेताओं ने मंच से कहा कि पंचायत सचिवों की मांगें जायज हैं और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में विभिन्न जिलों से पहुंचे पंचायत सचिव मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने कहा कि जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी बड़ा प्रदर्शन भी किया जाएगा।

सरकार और संघ के बीच समाधान की उम्मीद

फिलहाल सरकार की ओर से आंदोलन पर कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत सचिव ग्रामीण प्रशासन का अहम हिस्सा हैं, इसलिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकलना जरूरी है।

अगर जल्द सहमति नहीं बनती है तो पंचायत स्तर की कई सेवाओं पर असर और बढ़ सकता है।

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