बिहार MLC चुनाव में बड़ा संकेत! विधान परिषद पहुंच सकते हैं निशांत कुमार

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बिहार की राजनीति में एक बार फिर बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार विधान परिषद चुनाव की घोषणा के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) समेत एनडीए के भीतर उम्मीदवारों को लेकर मंथन शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को लेकर हो रही है, जो फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उन्हें जल्द ही विधान परिषद भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट के बजाय निशांत कुमार को जून 2026 में खाली होने वाली सीटों में से किसी एक पर उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

10 सीटों पर होगा चुनाव और उपचुनाव

बिहार विधान परिषद की कुल 10 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। इनमें 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होंगे, जबकि एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। यह उपचुनाव नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर होगा।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, चुनाव की अधिसूचना 1 जून को जारी होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। सभी सीटों पर मतदान 18 जून को कराया जाएगा।

इन सीटों का चुनाव विधानसभा कोटे से होना है, जहां मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एनडीए मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है।

निशांत कुमार को किस सीट से मौका मिल सकता है?

जेडीयू सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को उन 9 सीटों में से किसी एक पर उम्मीदवार बनाया जा सकता है, जिनका कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है।

यदि ऐसा होता है तो निशांत कुमार अगले छह वर्षों तक विधान परिषद के सदस्य बने रह सकते हैं। वहीं, नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट का कार्यकाल केवल 2030 तक ही बचा है। इसी वजह से पार्टी लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना सकती है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जेडीयू आने वाले वर्षों की राजनीति को देखते हुए युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

जेडीयू में टिकट को लेकर मंथन तेज

जेडीयू के भीतर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा शुरू हो चुकी है। निशांत कुमार के अलावा ललन मंडल और भीष्म सहनी जैसे नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं।

हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। पार्टी फिलहाल जातीय समीकरण, संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक संदेश को ध्यान में रखकर रणनीति बना रही है।

सूत्रों का कहना है कि जेडीयू अपनी मजबूत सीटों पर भरोसेमंद और भविष्य की राजनीति में उपयोगी चेहरों को मौका दे सकती है।

क्या एनडीए की 9 सीटों पर जीत तय मानी जा रही?

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखें तो एनडीए की स्थिति काफी मजबूत है। विधानसभा में एनडीए के 200 से अधिक विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास करीब 35 विधायक हैं।

एक एमएलसी सीट जीतने के लिए लगभग 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। इसी गणित के आधार पर राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि 10 में से 9 सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

वहीं, विपक्षी गठबंधन को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।

भाजपा और सहयोगी दलों में भी हलचल

एनडीए के भीतर भाजपा भी अपने कोटे की सीटों पर रणनीति बना रही है। माना जा रहा है कि भाजपा कम से कम तीन सीटों पर दावा कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को दी जा सकती है। इस सीट से मंत्री दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाया जा सकता है। दीपक प्रकाश भी फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं और मंत्री बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर विधायक या एमएलसी बनना जरूरी है।

भाजपा में नए चेहरों को मिल सकता है मौका

भाजपा के अंदर भी नए चेहरों को मौका देने की चर्चा तेज है। जून में खाली होने वाली भाजपा की दो सीटों में एक सम्राट चौधरी की सीट है, जबकि दूसरी सीट संजय मयूख की है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संजय मयूख को पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो विधान परिषद में उनकी जगह किसी नए चेहरे को मौका मिल सकता है।

भाजपा इस बार उम्मीदवार चयन में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी विशेष ध्यान दे सकती है।

बिहार की राजनीति के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?

विधान परिषद चुनाव भले सीधे जनता द्वारा नहीं लड़ा जाता, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा होता है। यह चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की संगठनात्मक ताकत का संकेत देता है।

इसके साथ ही, कई ऐसे नेता जिन्हें विधानसभा चुनाव में मौका नहीं मिल पाता, उन्हें विधान परिषद के जरिए सरकार और संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाती है।

यही वजह है कि इस बार का चुनाव बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

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