बेगूसराय DTO ऑफिस में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़, बड़ा बाबू और दलाल गिरफ्तार


 

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच बेगूसराय DTO ऑफिस में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। बेगूसराय DTO ऑफिस में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने गाड़ी ट्रांसफर कराने के नाम पर रिश्वत लेते हुए बड़ा बाबू संजय कुमार और उनके निजी दलाल शिवानंद को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद जिला परिवहन कार्यालय में हड़कंप मच गया है। निगरानी विभाग की टीम दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना रवाना हो गई है।

बताया जा रहा है कि वाहन ट्रांसफर से जुड़े एक मामले में पीड़ित व्यक्ति से ₹6,000 की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले का सत्यापन किया और फिर जाल बिछाकर कार्रवाई को अंजाम दिया।

गाड़ी ट्रांसफर के नाम पर मांगी गई रिश्वत

जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति अपनी गाड़ी का स्वामित्व हस्तांतरण कराने के लिए लंबे समय से बेगूसराय DTO कार्यालय के चक्कर लगा रहा था।

पीड़ित का आरोप है कि उसका काम जानबूझकर रोका जा रहा था। बाद में बड़ा बाबू संजय कुमार और उनके निजी दलाल शिवानंद ने फाइल आगे बढ़ाने के बदले ₹6,000 की मांग की।

लगातार परेशान होने के बाद पीड़ित ने इसकी शिकायत पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने मामले की प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई।

इसके बाद अधिकारियों ने विशेष ट्रैप टीम गठित कर कार्रवाई की योजना तैयार की।

केमिकल लगे नोटों के साथ रंगे हाथों गिरफ्तारी

निगरानी ब्यूरो के डीएसपी के नेतृत्व में गठित टीम ने शुक्रवार को बेगूसराय DTO कार्यालय में जाल बिछाया।

योजना के अनुसार, पीड़ित को केमिकल लगे नोट दिए गए और रिश्वत की रकम आरोपियों तक पहुंचाने को कहा गया।

जैसे ही बड़ा बाबू संजय कुमार और दलाल शिवानंद ने ₹6,000 की राशि ली, निगरानी टीम ने तुरंत दोनों को पकड़ लिया।

इसके बाद आरोपियों के हाथ धुलवाए गए। जांच के दौरान हाथों का रंग गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का वैज्ञानिक प्रमाण माना जाता है।

इस कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया। कई कर्मचारी और आम लोग मौके पर जुट गए।

निगरानी थाना में दर्ज हुआ मामला

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पटना स्थित निगरानी थाना में कांड संख्या 63/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

अधिकारियों के अनुसार, दोनों को विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

निगरानी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी सरकारी कार्यालय में रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकारी दफ्तरों में बढ़ी हलचल

बेगूसराय DTO कार्यालय में हुई इस कार्रवाई के बाद अन्य सरकारी विभागों में भी हलचल तेज हो गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सरकारी कार्यालयों में आम लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है। ऐसे में निगरानी विभाग की यह कार्रवाई लोगों के बीच सकारात्मक संदेश लेकर आई है।

कई लोगों ने उम्मीद जताई कि इस तरह की कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों पर लगाम लगेगी।

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती

पिछले कुछ समय से बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। विभिन्न जिलों में रिश्वत लेने वाले सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ लगातार ट्रैप कार्रवाई की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ती है और आम लोगों का भरोसा मजबूत होता है।

हालांकि, प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाना भी जरूरी माना जा रहा है।

आम लोगों के लिए बड़ा संदेश

बेगूसराय DTO रिश्वत कांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी सेवाओं के लिए लोगों को रिश्वत क्यों देनी पड़ती है।

इस घटना के बाद निगरानी विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत तुरंत संबंधित एजेंसी से करें।

विभाग का कहना है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस पूरे मामले में आगे की जांच जारी है और निगरानी विभाग आरोपियों से पूछताछ कर अन्य पहलुओं की भी जांच कर रहा है।

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