निशांत कुमार को मंत्री बनाने पर बोले अनंत सिंह, परिवारवाद नहीं विकासवाद


 

जनता दल यूनाइटेड के चर्चित नेता और मोकामा विधायक Anant Singh ने निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। बिहार की राजनीति में निशांत कुमार को लेकर लगातार परिवारवाद की बहस चल रही है, लेकिन अनंत सिंह ने साफ कहा कि एक बेटे को आगे बढ़ाना परिवारवाद नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे “बहुत बढ़िया फैसला” बताते हुए कहा कि राजनीति में परिवारवाद की परिभाषा अलग होती है।

हाल के दिनों में बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे निशांत कुमार की संभावित राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच अनंत सिंह का बयान राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ गया है।

परिवारवाद पर क्या बोले अनंत सिंह?

एक यू-ट्यूब इंटरव्यू में अनंत सिंह ने कहा कि परिवारवाद तब माना जाता है जब पूरा खानदान राजनीति में उतार दिया जाए। उनके मुताबिक अगर कोई अपने बेटे या बेटी को आगे बढ़ाता है तो उसे परिवारवाद नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि “अगर कोई एक बेटा को खड़ा करता है तो वह परिवारवाद नहीं है। परिवारवाद तब होता है जब भाई, भतीजा, रिश्तेदार और पूरा परिवार सत्ता में आ जाए।”

अनंत सिंह ने यह भी कहा कि Nitish Kumar ने अपने परिवार को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया। इसलिए उन पर परिवारवाद का आरोप लगाना गलत है।

निशांत कुमार को मंत्री बनाने का समर्थन

निशांत कुमार को बिहार सरकार में मंत्री बनाए जाने की चर्चाओं पर अनंत सिंह ने खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता अपने बेटे को आगे बढ़ाना चाहता है तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज और राजनीति दोनों में नई पीढ़ी को मौका मिलना जरूरी है। उनके अनुसार, किसी एक सदस्य की राजनीतिक एंट्री को वंशवाद कहना उचित नहीं होगा।

बिहार की राजनीति में लंबे समय से परिवारवाद बनाम राजनीतिक विरासत पर बहस होती रही है। ऐसे में अनंत सिंह का यह बयान खास महत्व रखता है क्योंकि वे खुद भी क्षेत्रीय राजनीति के प्रभावशाली चेहरे माने जाते हैं।

खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे अनंत सिंह

मोकामा से छह बार विधायक रह चुके Anant Singh ने यह भी साफ कर दिया कि वे आगे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अब उनकी जगह अगला चुनाव उनका बेटा लड़ सकता है।

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीति छोड़ने का मतलब जनता से दूरी बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि चाहे विधायक उनका बेटा बने या कोई दूसरा, वे जनता की सेवा करते रहेंगे।

अनंत सिंह का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनके परिवार का राजनीति से पुराना संबंध रहा है। उनसे पहले उनके भाई दिलीप सिंह मोकामा से विधायक रह चुके थे। बाद में उनकी पत्नी नीलम देवी भी विधायक बनीं।

बिहार में फिर तेज हुई वंशवाद की बहस

बिहार की राजनीति में परिवारवाद हमेशा बड़ा मुद्दा रहा है। विपक्षी दल अक्सर राजनीतिक दलों पर परिवार आधारित राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अनंत सिंह के बयान के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि आखिर परिवारवाद की सीमा क्या होनी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय राजनीति में अब नई पीढ़ी की एंट्री तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कई नेता इसे राजनीतिक उत्तराधिकार मानते हैं, जबकि विरोधी दल इसे वंशवाद कहते हैं।

अनंत सिंह ने अपने बयान में शादी और परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई अपने बच्चों को आगे नहीं बढ़ाएगा तो फिर परिवार बनाने का क्या मतलब है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा

अनंत सिंह के बयान के बाद बिहार की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खासकर जेडीयू और एनडीए की राजनीति में निशांत कुमार की भूमिका को लेकर कयास और तेज हो गए हैं।

हालांकि अभी तक सरकार या पार्टी की ओर से निशांत कुमार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक संकेतों को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।

बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए युवा चेहरों को आगे लाने की रणनीति भी अहम मानी जा रही है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।

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