सम्राट के सीएम बनने पर प्रशांत किशोर का हमला, 'बिहार की सत्ता की डोर गुजरात से नियंत्रित होगी'


 

पटना: प्रशांत किशोर बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। प्रशांत किशोर बयान में उन्होंने सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर तीखा हमला करते हुए दावा किया कि अब बिहार की सत्ता का नियंत्रण राज्य से बाहर होगा। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला बिहार के आत्मसम्मान और राजनीतिक स्वायत्तता से जुड़ा मुद्दा है।

उनके बयान के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

‘गुजरात से नियंत्रित होगी सत्ता’ वाला दावा

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की सत्ता अब पटना के बजाय गुजरात से संचालित होगी।

उनके अनुसार, यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि नियंत्रण के केंद्र में बदलाव का संकेत है।

उन्होंने इस मुद्दे को सीधे तौर पर राज्य के आत्मसम्मान से जोड़ा।

भाजपा के ‘चाल, चरित्र और चेहरा’ पर सवाल

प्रशांत किशोर ने भाजपा के पुराने नारे पर भी निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि पार्टी खुद को “चाल, चरित्र और चेहरा” की राजनीति करने वाली बताती है, लेकिन मौजूदा फैसला इन तीनों पहलुओं पर सवाल खड़े करता है।

उनका कहना है कि जनता को इस बदलाव के पीछे की वास्तविक मंशा समझनी चाहिए।

‘सत्ता की चाबी’ किसके पास?

प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर यह सवाल उठाया कि असली नियंत्रण किसके हाथ में रहेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कौन है, यह कम महत्वपूर्ण है, असली बात यह है कि फैसले कौन लेगा।

उनके मुताबिक, राज्य की “सत्ता की चाबी” केंद्र के शीर्ष नेतृत्व के पास होगी।

युवाओं और रोजगार पर भी उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने आर्थिक मुद्दों को भी अपने बयान में शामिल किया।

उन्होंने कहा कि मौजूदा नीतियों के कारण बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।

उनका दावा है कि आने वाले समय में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।

राजनीतिक बदलाव के बाद बढ़ी बयानबाजी

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।

एक तरफ सत्ता पक्ष इसे स्थिरता और विकास की दिशा में कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक नियंत्रण का मामला बना रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

क्यों अहम है यह विवाद?

  • राज्य बनाम केंद्र नियंत्रण की बहस
  • राजनीतिक स्वायत्तता पर सवाल
  • युवाओं और रोजगार पर चिंता
  • आगामी चुनावों पर संभावित असर

यह मुद्दा केवल बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राज्य की राजनीति की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।

आगे क्या?

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आरोपों पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

फिलहाल, बिहार की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स

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