संसद में चल रही बहस के बीच नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा आह्वान किया है। इस नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर उन्होंने सभी सांसदों से इसके पक्ष में मतदान करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने इसे देश के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि समाज में संतुलन और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संसद में देर रात तक चली चर्चा
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस संशोधन पर संसद में विस्तृत चर्चा हुई है।
उन्होंने कहा कि बहस देर रात तक चली और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
इस दौरान विभिन्न दलों के सांसदों ने अपने-अपने सुझाव और चिंताएं भी रखीं।
सरकार का दावा है कि अधिकांश सवालों का जवाब दिया जा चुका है।
भ्रम दूर करने पर दिया जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विधेयक को लेकर जो भी भ्रम फैलाए गए थे, उन्हें स्पष्ट कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जहां भी जानकारी की कमी थी, वहां सदस्यों को आवश्यक विवरण उपलब्ध कराया गया।
इससे चर्चा अधिक तथ्य आधारित और संतुलित बनी।
सरकार का मानना है कि अब इस विषय पर स्पष्टता बढ़ी है।
चार दशक पुराना मुद्दा
महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से राजनीति का हिस्सा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब चार दशकों से इस विषय पर चर्चा हो रही है।
अब इसे निर्णायक रूप देने का समय आ गया है।
उन्होंने इसे देश के सामाजिक और राजनीतिक विकास के लिए जरूरी बताया।
महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर चिंता
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सीमित है।
उन्होंने इसे सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उनका मानना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीति निर्माण में विविधता और संतुलन आएगा।
यह लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा।
सांसदों से संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की अपील
मतदान से पहले प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति से जुड़ा नहीं है, बल्कि समाज के व्यापक हित से जुड़ा है।
उन्होंने सभी दलों से एकजुट होकर इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की।
यह अपील राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर की गई।
नारी शक्ति की भावनाओं का सम्मान
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की करोड़ों महिलाएं इस फैसले पर नजर रख रही हैं।
उन्होंने सांसदों से अपील की कि ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे महिलाओं की भावनाएं आहत हों।
यह विधेयक महिलाओं के सम्मान और अधिकार से जुड़ा है।
इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
अंतरात्मा की आवाज सुनने का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से कहा कि वे अपने परिवार की महिलाओं को याद करें।
उन्होंने कहा कि मां, बहन, बेटी और पत्नी के बारे में सोचकर निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने अंतरात्मा की आवाज सुनने का संदेश दिया।
यह अपील भावनात्मक और नैतिक दोनों स्तर पर थी।
लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर
प्रधानमंत्री ने इस संशोधन को लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर बताया।
उन्होंने कहा कि अगर इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया तो यह ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और लोकतांत्रिक ढांचा और सशक्त होगा।
यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
Source: संसद कार्यवाही और आधिकारिक बयान
