बिहार में जमीन मापी का नया नियम लागू, 7 दिन में मापी अनिवार्य और 14 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में जमीन मापी नया नियम लागू होने के बाद अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो गई है। इस जमीन मापी नया नियम के तहत आवेदन से लेकर रिपोर्ट तक सब कुछ ऑनलाइन किया गया है। बिहार सरकार ने सभी जिलों को निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे।
इस बदलाव का उद्देश्य प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है, ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन, खत्म हुआ ऑफलाइन सिस्टम
नई व्यवस्था के तहत अब जमीन मापी के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन ही किया जा सकेगा।
मापी के बाद रिपोर्ट भी पोर्टल पर ही अपलोड की जाएगी, जिससे दस्तावेजों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर ऑफलाइन प्रक्रिया स्वीकार नहीं होगी।
अगर कोई कर्मचारी नियमों का पालन नहीं करता है तो उस पर कार्रवाई तय है।
7 दिन में मापी, 14 दिन में रिपोर्ट अनिवार्य
सरकार ने समय सीमा भी तय कर दी है, जिससे काम में देरी न हो।
आवेदन के बाद सात दिनों के भीतर जमीन की मापी पूरी करनी होगी।
इसके बाद 14 दिनों के अंदर रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा।
इससे वर्षों से लंबित मामलों के जल्द निपटारे की उम्मीद है।
जियो टैगिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई प्रक्रिया में जियो टैगिंग को अनिवार्य किया गया है।
मापी के दौरान अमीन को मौके पर ही जियो टैग फोटो अपलोड करनी होगी।
अगर ऐसा नहीं किया गया तो मापी को अधूरा माना जाएगा।
इस कदम से फर्जीवाड़े और गड़बड़ी की संभावना कम होगी।
तीन दिन में अमीन की नियुक्ति
नियम के अनुसार, आवेदन मिलने के तीन दिनों के भीतर अमीन की नियुक्ति कर दी जाएगी।
इसके बाद संबंधित पक्षों को नोटिस भेजा जाएगा और तय दिन पर मापी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इससे प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी और अनावश्यक देरी नहीं होगी।
साथ ही, हर चरण की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।
दफ्तर के चक्कर से मिलेगी राहत
इस नई व्यवस्था से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है।
अब रैयतों को मापी के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
वे घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और निर्धारित समय में काम पूरा हो जाएगा।
इससे समय और संसाधनों की बचत होगी।
निगरानी होगी उच्च स्तर पर
पूरी प्रक्रिया की निगरानी अपर समाहर्ता (Additional Collector) स्तर से की जाएगी।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी अधिकारी नियमों का पालन करें।
अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
यह व्यवस्था जवाबदेही को मजबूत करेगी।
क्या बदल जाएगा आम लोगों के लिए?
नई प्रणाली से जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा।
डिजिटल रिकॉर्ड होने से विवादों में भी कमी आने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम साबित होगा।
आने वाले समय में यह मॉडल अन्य सेवाओं में भी लागू किया जा सकता है।
Source: सरकारी निर्देश और प्रशासनिक जानकारी
