बिहार में Nishant Kumar Z Security को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। Nishant Kumar Z Security के तहत जदयू नेता Nishant Kumar को जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया है।
वहीं, पूर्व डिप्टी सीएम Vijay Kumar Sinha की सुरक्षा को घटाकर जेड श्रेणी कर दिया गया है।
नई सरकार बनने के बाद नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है।
किन नेताओं की सुरक्षा में हुआ बदलाव?
राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद कई अहम फैसले लिए हैं।
Nishant Kumar को जेड श्रेणी सुरक्षा दी गई है, जबकि Vijay Kumar Sinha की सुरक्षा जेड प्लस से घटाई गई है।
इसके अलावा, जदयू के वरिष्ठ नेता Shravan Kumar को एस्कॉर्ट के साथ वाई प्लस सुरक्षा प्रदान की गई है।
क्या होती है जेड और जेड प्लस सिक्योरिटी?
जेड श्रेणी सुरक्षा उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को दी जाती है।
इसमें करीब 22 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, जिनमें 4 से 6 कमांडो शामिल रहते हैं।
वहीं, जेड प्लस सुरक्षा इससे एक स्तर ऊपर होती है, जिसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी होते हैं।
गृह विभाग ने जारी किया निर्देश
बिहार के गृह विभाग ने राज्य सुरक्षा समिति की सिफारिश के बाद यह निर्णय लिया।
इस संबंध में डीजीपी और विशेष शाखा को आधिकारिक पत्र भेजा गया है।
सुरक्षा में यह बदलाव नई सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
डिप्टी सीएम और अन्य नेताओं को भी सुरक्षा
हाल ही में नई सरकार में डिप्टी सीएम बने Vijay Kumar Choudhary और Bijendra Prasad Yadav को भी जेड सुरक्षा दी गई है।
अब Nishant Kumar भी इसी स्तर की सुरक्षा में रहेंगे।
यह संकेत देता है कि सरकार सुरक्षा को लेकर सतर्क रुख अपना रही है।
नीतीश कुमार को Z+ सुरक्षा
पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar को पहले ही जेड प्लस सुरक्षा दी जा चुकी है।
करीब दो दशक तक मुख्यमंत्री रहने के बाद अब वे राज्यसभा सांसद हैं।
उनकी सुरक्षा को राज्य में सबसे उच्च श्रेणी में रखा गया है।
क्यों बदली जा रही सुरक्षा व्यवस्था?
नई सरकार बनने के बाद सुरक्षा समीक्षा एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होती है।
नेताओं की भूमिका, पद और संभावित खतरे के आधार पर सुरक्षा तय की जाती है।
इस बार भी इन्हीं मानकों को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए गए हैं।
क्या है इसका राजनीतिक संकेत?
सुरक्षा में बदलाव को केवल प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे नई सरकार के प्राथमिकताओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में और भी बदलाव संभव हैं।
Source: बिहार गृह विभाग
