प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई मोदी-मैक्रों बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा प्रमुख मुद्दा रही। इस मोदी-मैक्रों बातचीत में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात पर विस्तार से चर्चा की और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों ने सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने और तनाव कम करने के लिए मिलकर काम करने का फैसला किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा पर बनी सहमति
भारत और फ्रांस ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
दोनों नेताओं का मानना है कि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
उन्होंने तत्काल प्रभाव से सुरक्षित नेविगेशन बहाल करने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही।
पश्चिम एशिया के हालात पर गहरी चिंता
बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
दोनों नेताओं ने माना कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकती है।
इसलिए उन्होंने कूटनीतिक माध्यमों से समाधान निकालने और संवाद को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
दूसरी बार हुई अहम बातचीत
पश्चिम एशिया संकट के बीच यह दूसरी बार है जब राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की है।
इससे पहले 19 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई थी, जिसमें क्षेत्रीय हालात को लेकर चिंता जताई गई थी।
लगातार हो रही ये बातचीत इस बात का संकेत है कि दोनों देश इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं।
संवाद और कूटनीति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
यह रुख वैश्विक स्तर पर संतुलित और जिम्मेदार कूटनीति को दर्शाता है।
अमेरिका से भी हुआ संपर्क
इससे पहले 14 अप्रैल को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बातचीत की थी।
इस दौरान द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा हुई थी।
यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक स्तर पर सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है।
तनाव के बीच बढ़ा वैश्विक कूटनीतिक संपर्क
ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी संघर्ष की स्थिति के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
भारत, फ्रांस और अमेरिका जैसे प्रमुख देशों के बीच लगातार संवाद क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास भविष्य में बड़े संकट को टालने में मदद कर सकते हैं।
Source: आधिकारिक बयान / सोशल मीडिया पोस्ट
