किशनगंज फर्जी आधारकार्ड गिरोह का बड़ा खुलासा बिहार के सीमांचल क्षेत्र में हुआ है। यह कार्रवाई हाल ही में टेढ़ागाछ थाना क्षेत्र में की गई, जहां पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह में स्थानीय व्यक्ति शामिल था, जो फर्जी आधारकार्ड और दस्तावेज तैयार करता था। किशनगंज फर्जी आधारकार्ड गिरोह के पीछे बड़ा नेटवर्क होने की आशंका है, जो बंगाल से लेकर यूपी तक फैला हुआ बताया जा रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह का संबंध घुसपैठियों से है और यह कैसे काम करता था।
कैसे हुआ फर्जी आधारकार्ड गिरोह का खुलासा?
पुलिस को इस गिरोह की जानकारी गुप्त सूचना के जरिए मिली थी। इसके बाद एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई।
एसडीपीओ मंगलेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने टेढ़ागाछ इलाके में छापेमारी की। लंबे समय से टीम इस नेटवर्क पर नजर रख रही थी और सही समय का इंतजार कर रही थी।
जैसे ही पुख्ता सबूत मिले, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया।
आरोपी की गिरफ्तारी और बरामद सामान
छापेमारी के दौरान पुलिस ने टेढ़ागाछ के बलुआजगीर निवासी मनोहर कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया।
आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और उपकरण बरामद किए गए, जिनमें शामिल हैं:
- करीब 400 लोगों के नाम पर अलग-अलग आधारकार्ड
- लैपटॉप, मॉनिटर और सीपीयू
- थंब और फिंगरप्रिंट स्कैनर
- पासबुक, एटीएम कार्ड
- जाति प्रमाण पत्र और खतियान
- स्कूल के प्रधानाध्यापक और सरपंच के मोहर
कुल मिलाकर 57 प्रकार के दस्तावेज और उपकरण पुलिस ने जब्त किए हैं, जो इस गिरोह के बड़े स्तर पर सक्रिय होने की पुष्टि करते हैं।
किराना दुकान की आड़ में चल रहा था खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी अपनी किराना दुकान की आड़ में इस अवैध काम को अंजाम देता था।
स्थानीय लोगों को शक भी नहीं होता था कि दुकान के पीछे फर्जी दस्तावेज बनाने का पूरा सेटअप चल रहा है।
यहीं से आधारकार्ड समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार कर अलग-अलग राज्यों में भेजे जाते थे।
बंगाल से यूपी तक फैला नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह गिरोह सिर्फ किशनगंज तक सीमित नहीं था।
इसका नेटवर्क सीमांचल के अन्य जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों तक फैला हुआ था।
इससे यह संकेत मिलता है कि गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और बड़ी संख्या में लोगों को फर्जी पहचान उपलब्ध करा रहा था।
घुसपैठ कनेक्शन की जांच में जुटी पुलिस
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि पुलिस अब इस गिरोह के संभावित घुसपैठ कनेक्शन की भी जांच कर रही है।
सीमावर्ती इलाका होने के कारण आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल अवैध घुसपैठियों को पहचान पत्र उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता था।
हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस एंगल पर गंभीरता से काम कर रही हैं।
पहले से चल रही थी निगरानी
पुलिस ने बताया कि इस तरह के फर्जी दस्तावेज बनाने की शिकायतें पहले भी मिल रही थीं।
इसी के आधार पर एक टीम का गठन कर लगातार निगरानी की जा रही थी।
जैसे ही पर्याप्त साक्ष्य जुटे, पुलिस ने कार्रवाई कर मुख्य आरोपी को पकड़ लिया।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ टेढ़ागाछ थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है, जिससे और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
Source: पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी
