नीतीश के राज्यसभा जाने पर मांझी नाराज, बोले- बधाई नहीं दूंगा

 


बिहार की राजनीति में जीतनराम मांझी बयान को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। जीतनराम मांझी बयान में उन्होंने साफ कहा कि वे नीतीश कुमार को राज्यसभा सदस्य बनने पर बधाई नहीं देंगे। इस बयान ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है, खासकर उस समय जब नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें चल रही हैं।

मांझी के इस रुख को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले दिनों में सत्ता समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

मांझी ने क्यों नहीं दी बधाई?

केंद्रीय मंत्री और HAM के प्रमुख जीतनराम मांझी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि वे केवल इतना कहना चाहते हैं कि “बिहार विल मिस यू नीतीश जी।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मौके पर बधाई देने के बजाय राज्य की भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं। उनके इस बयान को एक तरह की नाराजगी और राजनीतिक संदेश दोनों के रूप में देखा जा रहा है।

राज्यसभा की शपथ और बदलता राजनीतिक परिदृश्य

नीतीश कुमार ने शुक्रवार को संसद भवन में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। उन्हें यह शपथ उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने दिलाई।

इस दौरान NDA के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। शपथ के साथ ही यह लगभग तय माना जा रहा है कि बिहार में जल्द नेतृत्व परिवर्तन होगा।

सूत्रों के अनुसार, पटना लौटने के बाद वे कुछ दिनों में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

बिहार में नए मुख्यमंत्री की तैयारी

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। माना जा रहा है कि इस बार मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जा सकता है।

दिल्ली में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा हो सकती है।

इस घटनाक्रम के बीच सहयोगी दलों की भूमिका और रुख भी अहम हो गया है।

मांझी और नीतीश का पुराना रिश्ता

नीतीश कुमार और जीतनराम मांझी के बीच राजनीतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। 2014 में जब जदयू को लोकसभा चुनाव में हार मिली थी, तब नीतीश ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था।

उस समय मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन वे करीब 9 महीने ही इस पद पर रह सके। बाद में मतभेद बढ़ने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया और नीतीश फिर से मुख्यमंत्री बन गए।

इसके बाद मांझी ने अलग होकर अपनी पार्टी बनाई और अलग राजनीतिक राह चुनी।

NDA में मांझी की भूमिका

वर्तमान में मांझी NDA का हिस्सा हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की और केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उनके बेटे संतोष सुमन भी बिहार सरकार में मंत्री हैं, जिससे राज्य की राजनीति में उनका प्रभाव बना हुआ है।

ऐसे में मांझी का यह बयान NDA के अंदरूनी समीकरण को लेकर भी संकेत देता है।

क्या कहता है यह बयान?

विशेषज्ञों का मानना है कि मांझी का बयान केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी हो सकता है।

यह बयान उस समय आया है जब बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, अभी तक NDA की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में कौन नया मुख्यमंत्री बनेगा और गठबंधन की राजनीति किस दिशा में जाएगी।

मांझी जैसे वरिष्ठ नेता के बयान से यह साफ है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

बिहार की राजनीति में यह दौर बदलाव और नए समीकरणों का संकेत दे रहा है, जहां हर बयान और हर कदम का बड़ा महत्व है।

Source: मीडिया रिपोर्ट्स / सोशल मीडिया पोस्ट

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