नीतीश राज्यसभा पहुंचे, अब बिहार में नया CM कौन? बिहार को अब तक किस जाति के मुख्यमंत्री मिले, देखें लिस्ट


बिहार की राजनीति में बड़ा सवाल उभरकर सामने आया है—बिहार नया CM कौन होगा? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार नया CM कौन बनेगा, इस पर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस चर्चा के बीच राज्य की राजनीति में जातीय समीकरण एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

बिहार में सत्ता के शीर्ष पद पर अलग-अलग जातियों का प्रतिनिधित्व रहा है, लेकिन कुछ खास वर्गों का दबदबा अधिक दिखाई देता है।

राज्यसभा पहुंचने के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?

नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के साथ ही बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

इस बदलाव के साथ ही यह सवाल उठने लगा है कि अगला मुख्यमंत्री किस जाति से होगा और कौन-सा सामाजिक समीकरण सत्ता में दिखेगा।

राजनीतिक दल भी इस समीकरण को साधने में जुट गए हैं।

1990 से पहले सवर्ण CM का दबदबा

आजादी के बाद लंबे समय तक बिहार की राजनीति में सवर्ण वर्ग का वर्चस्व रहा। पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने करीब 17 साल से ज्यादा समय तक शासन किया।

इसके अलावा जगन्नाथ मिश्रा जैसे नेताओं ने भी लंबा कार्यकाल पूरा किया। कुल मिलाकर सवर्ण वर्ग का करीब 37 साल तक मुख्यमंत्री पद पर प्रभाव रहा।

यह दौर 1990 के पहले तक स्पष्ट रूप से देखा गया।

🏛️ बिहार के सवर्ण मुख्यमंत्री

श्रीकृष्ण सिंह
⏳ 17 वर्ष 52 दिन
🏷️ भूमिहार
केबी सहाय
⏳ 3 वर्ष 154 दिन
🏷️ कायस्थ
बिंदेश्वरी दूबे
⏳ 2 वर्ष 338 दिन
🏷️ ब्राह्मण
विनोदानंद झा
⏳ 2 वर्ष 226 दिन
🏷️ ब्राह्मण
चंद्रशेखर सिंह
⏳ 1 वर्ष 210 दिन
🏷️ राजपूत
केदार पांडेय
⏳ 1 वर्ष 105 दिन
🏷️ ब्राह्मण
भागवत झा
⏳ 1 वर्ष 24 दिन
🏷️ ब्राह्मण
महामाया प्रसाद सिन्हा
⏳ 329 दिन
🏷️ कायस्थ
सत्येंद्र नारायण
⏳ 270 दिन
🏷️ राजपूत
हरिहर सिंह
⏳ 117 दिन
🏷️ राजपूत
दीपनारायण सिंह
⏳ 17 दिन
🏷️ राजपूत
जगन्नाथ मिश्रा
⏳ 5 वर्ष 180 दिन
🏷️ ब्राह्मण

1990 के बाद पिछड़ा वर्ग का उभार

1990 के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग के नेताओं ने सत्ता की कमान संभालनी शुरू की।

लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने मिलकर करीब सात साल तक शासन किया। वहीं, नीतीश कुमार ने सबसे लंबे समय तक इस वर्ग का प्रतिनिधित्व किया।

अतिपिछड़ा वर्ग से कर्पूरी ठाकुर एकमात्र ऐसे नेता रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला।

🏛️ बिहार के पिछड़ा / अतिपिछड़ा मुख्यमंत्री

नीतीश कुमार
⏳ 17 साल से अधिक
🏷️ कुर्मी
लालू प्रसाद यादव
⏳ 7 वर्ष 130 दिन
🏷️ यादव
राबड़ी देवी
⏳ 7 वर्ष 190 दिन
🏷️ यादव
दरोगा प्रसाद राय
⏳ 310 दिन
🏷️ यादव
सतीश प्रसाद सिंह
⏳ 5 दिन
🏷️ कुशवाहा
बीपी मंडल
⏳ 51 दिन
🏷️ यादव
कर्पूरी ठाकुर
⏳ 2 वर्ष 98 दिन
🏷️ अति पिछड़ा वर्ग

दलित और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व

बिहार में दलित वर्ग से भी कुछ मुख्यमंत्री बने हैं, लेकिन उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहा। इससे यह साफ होता है कि इस वर्ग को लंबे समय तक नेतृत्व का मौका नहीं मिला।

अल्पसंख्यक यानी मुस्लिम समुदाय से भी एक ही मुख्यमंत्री बना है, जो राज्य की विविधता के बावजूद सीमित प्रतिनिधित्व को दर्शाता है।

यह आंकड़े बताते हैं कि बिहार की राजनीति में सभी वर्गों की भागीदारी तो रही, लेकिन बराबरी का प्रतिनिधित्व अभी भी चुनौती है।

🏛️ बिहार के अनुसूचित जाति / अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री

भोला पासवान शास्त्री
⏳ 335 दिन
🏷️ पासवान
राम सुंदर दास
⏳ 302 दिन
🏷️ रविदास
जीतन राम मांझी
⏳ 278 दिन
🏷️ मुसहर
अब्दुल गफूर
⏳ 1 वर्ष 283 दिन
🏷️ मुस्लिम

क्या इस बार बदलेगा समीकरण?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार मुख्यमंत्री किस वर्ग से होगा। क्या फिर से पिछड़ा वर्ग का नेता सामने आएगा या कोई नया सामाजिक समीकरण बनेगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जा सकता है। यह भी संभव है कि कोई ऐसा चेहरा सामने आए, जो अब तक मुख्यमंत्री नहीं बना हो।

महिला नेतृत्व को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं, क्योंकि राबड़ी देवी के बाद कोई दूसरी महिला मुख्यमंत्री नहीं बनी है।

NDA और विपक्ष की रणनीति

सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष दोनों ही इस मौके को अहम मान रहे हैं। NDA के भीतर नए चेहरे पर मंथन चल रहा है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश में है।

जातीय जनगणना के बाद यह पहला बड़ा राजनीतिक बदलाव हो सकता है, जिसमें सामाजिक संतुलन का खास ध्यान रखा जाएगा।

इसलिए आने वाला फैसला न सिर्फ राजनीतिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

🏛️ सीएम पद के संभावित चेहरे

1. सम्राट चौधरी
2. नित्यानंद राय
3. विजय कुमार सिन्हा
4. श्रेयसी सिंह
5. रेणु देवी
6. डॉ. संजय जायसवाल
7. संजीव चौरसिया
8. जनक राम
9. दिलीप कुमार जायसवाल
10. मंगल पांडे

क्यों अहम है यह फैसला?

बिहार में मुख्यमंत्री का चयन केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं होता, बल्कि यह सामाजिक समीकरण का भी प्रतिबिंब होता है।

हर बार सत्ता परिवर्तन के साथ नए वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश होती है, जिससे राजनीतिक संतुलन बना रहे।

इस बार भी यही उम्मीद की जा रही है कि फैसला व्यापक सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

बिहार नया CM कौन होगा, इसका जवाब जल्द ही सामने आ सकता है। लेकिन इतना तय है कि यह फैसला राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ने वाला होगा।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स / राजनीतिक विश्लेषण

और नया पुराने
हमसे जुड़ें
1

बड़ी खबर सबसे पहले पाएं!

देश, बिहार और नौकरी से जुड़ी हर बड़ी अपडेट सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।

👉 अभी WhatsApp चैनल जॉइन करें
होम क्विज वीडियो नोट्स NCERT