जमुई में Jamui bribery case ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस Jamui bribery case में निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिकंदरा नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभुकों की स्वीकृति के नाम पर कथित रूप से घूस मांगी जा रही थी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।
इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और नगर पंचायत कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कैसे सामने आया रिश्वत का मामला?
जानकारी के मुताबिक, वार्ड संख्या 3 के पार्षद राजेश कुमार मिश्रा ने निगरानी विभाग से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 65 लाभुकों को आवास स्वीकृति दिलाने के बदले रिश्वत मांगी जा रही है।
प्रति लाभुक ढाई हजार रुपये की मांग की गई थी। इस हिसाब से कुल 1 लाख 62 हजार 500 रुपये की अवैध रकम तय की गई थी।
शिकायत के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू की और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की योजना बनाई।
जाल बिछाकर रंगे हाथ गिरफ्तारी
निगरानी टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार पार्षद मंगलवार को 50 हजार रुपये की पहली किस्त लेकर नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे।
बताया जा रहा है कि कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार ने पार्षद को सीधे पैसे देने के बजाय स्वच्छता साथी सोनू कुमार को रकम देने को कहा।
जैसे ही सोनू कुमार ने पैसे लिए और अधिकारी के कक्ष में पहुंचे, पहले से मौजूद निगरानी टीम ने छापेमारी कर दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में हो सकते हैं बड़े खुलासे
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को थाना ले जाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की गई। इसके बाद टीम ने कार्यपालक पदाधिकारी को साथ लेकर नगर पंचायत कार्यालय में दस्तावेजों की जांच शुरू की।
अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाई
सिकंदरा क्षेत्र में यह पहली बार नहीं है जब निगरानी विभाग ने इस तरह की कार्रवाई की हो। इससे पहले भी कई अधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े जा चुके हैं।
अंचलाधिकारी, कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और बाल विकास परियोजना कार्यालय से जुड़े कर्मचारी भी निगरानी विभाग के शिकंजे में आ चुके हैं।
इससे साफ है कि क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
यह योजना गरीब और जरूरतमंद लोगों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए चलाई जाती है। ऐसे में लाभुकों से घूस मांगने के आरोप गंभीर माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और असली जरूरतमंदों को नुकसान होता है।
प्रशासन की सख्ती और आगे की कार्रवाई
निगरानी विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद अन्य सरकारी विभागों में भी सतर्कता बढ़ने की संभावना है।
जनता में बढ़ी नाराजगी
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए घूस देना बेहद चिंताजनक है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
