देश में परिसीमन विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस परिसीमन विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि देश में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और पारदर्शी है, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करना है।
प्रधान ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर गलत जानकारी देकर जनता को गुमराह करना उचित नहीं है।
परिसीमन को बताया संवैधानिक प्रक्रिया
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परिसीमन संविधान के तहत होने वाली एक नियमित प्रक्रिया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मकसद देश के संघीय ढांचे को मजबूत करना है।
सरकार इस प्रक्रिया को पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ा रही है।
इसमें किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश नहीं है।
विपक्ष के आरोपों को बताया भ्रामक
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके आरोप तथ्यहीन हैं।
उन्होंने कहा कि यह दावा गलत है कि परिसीमन से किसी विशेष क्षेत्र को नुकसान होगा।
उनके अनुसार, यह एक संकीर्ण राजनीतिक एजेंडा है, जिसका उद्देश्य भ्रम पैदा करना है।
उन्होंने जनता से अपील की कि वे तथ्यों पर आधारित जानकारी पर भरोसा करें।
दक्षिण भारत को लेकर उठे सवालों पर जवाब
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि परिसीमन में दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ भेदभाव किया जा सकता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधान ने कहा कि आंकड़े इस दावे को गलत साबित करते हैं।
उन्होंने बताया कि दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रतिशत बढ़ा है, जो निष्पक्षता को दर्शाता है।
इससे साफ है कि प्रक्रिया संतुलित और न्यायसंगत है।
अमित शाह के बयान का दिया हवाला
धर्मेंद्र प्रधान ने इस मुद्दे पर अमित शाह के बयान का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने परिसीमन को स्पष्ट संवैधानिक आधार पर रखा है।
शाह के अनुसार, यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।
प्रधान ने कहा कि इससे सभी राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।
‘कोऑपरेटिव फेडरलिज्म’ पर जोर
प्रधान ने कहा कि भारत की संघीय व्यवस्था सहयोग और संतुलन पर आधारित है।
उन्होंने ‘कोऑपरेटिव फेडरलिज्म’ की भावना को बनाए रखने की जरूरत बताई।
उनके अनुसार, परिसीमन का उद्देश्य किसी क्षेत्र की आवाज दबाना नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अधिकार देना है।
यह लोकतंत्र को मजबूत करने का एक अहम कदम है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी वर्षों तक सत्ता में रहते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करती रही है।
अब वही लोग परिसीमन के नाम पर डर और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रधान ने कहा कि जनता अब जागरूक है और ऐसे प्रयासों को समझती है।
देश को बांटने की कोशिश नहीं होगी सफल
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परिसीमन के नाम पर देश को क्षेत्रीय आधार पर बांटने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही है।
इस प्रक्रिया में सभी राज्यों और क्षेत्रों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य देश की एकता और लोकतांत्रिक मजबूती को बनाए रखना है।
आगे क्या है राजनीतिक असर?
परिसीमन को लेकर जारी बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पर व्यापक चर्चा और स्पष्टता जरूरी है।
फिलहाल, सरकार और विपक्ष के बीच इस विषय पर मतभेद बने हुए हैं।
Source: आधिकारिक बयान और मीडिया रिपोर्ट्स
