BPSC AEDO परीक्षा घोटाला अब बिहार में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। BPSC AEDO परीक्षा घोटाला मामले में अब तक 8 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और 38 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। जांच एजेंसियों को शुरुआती संकेत मिले हैं कि यह मामला किसी संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस पूरे मामले की जांच अपने हाथ में लेकर SIT का गठन किया है, जो सभी जिलों में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़कर जांच करेगी।
इस घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अभ्यर्थियों में भी चिंता बढ़ी है।
किन जिलों में दर्ज हुई FIR?
अब तक मुंगेर और नालंदा में सबसे पहले 14 और 17 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इसके बाद बेगूसराय, वैशाली और गया समेत कई जिलों में भी इसी तरह के मामले सामने आए।
जांच एजेंसियों का कहना है कि अलग-अलग जगहों पर एक जैसे तरीके से धांधली की कोशिश हुई, जिससे संगठित नेटवर्क की आशंका मजबूत होती है।
38 गिरफ्तार, पूछताछ में खुल रहे राज
पुलिस ने अब तक विभिन्न जिलों से 38 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इन सभी से गहन पूछताछ की जा रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार लोगों से मिली जानकारी से पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
SIT करेगी समेकित जांच
आर्थिक अपराध इकाई ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है।
यह टीम एसपी (प्रशासन) राजेश कुमार के नेतृत्व में काम कर रही है। टीम में कई अनुभवी डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
SIT का मुख्य उद्देश्य सभी जिलों में दर्ज मामलों को जोड़कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करना है।
बायोमेट्रिक और एजेंसी पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान बायोमेट्रिक सिस्टम में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। कई जिलों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं।
इसके अलावा परीक्षा संचालन में लगी निजी एजेंसी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
EOU ने इस एजेंसी के चयन प्रक्रिया और उसके पिछले रिकॉर्ड की भी जांच शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं इसे पहले ब्लैकलिस्ट तो नहीं किया गया था।
BPSC से ली गई विस्तृत जानकारी
EOU के अधिकारियों ने BPSC से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है।
इसमें प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों के चयन और निगरानी तक के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि हर स्तर पर जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि गड़बड़ी कहां और कैसे हुई।
क्या है आगे की चुनौती?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि संगठित गिरोह की पुष्टि होती है, तो उसके पूरे नेटवर्क को उजागर करना जरूरी होगा।
साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाना भी अहम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाकर ही इस तरह की धांधली पर रोक लगाई जा सकती है।
अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने?
इस मामले का सीधा असर उन हजारों उम्मीदवारों पर पड़ा है, जिन्होंने परीक्षा में हिस्सा लिया था।
यदि जांच में बड़े स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है, तो परीक्षा रद्द होने या दोबारा आयोजित करने की संभावना भी बन सकती है।
हालांकि, इस पर अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
