बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 के तहत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई रियायतें दी जा रही हैं। बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 का उद्देश्य उद्योगों का आर्थिक बोझ कम करना और राज्य को टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करना है। सरकार ने साफ किया है कि इस नीति से निवेश बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
यह पहल ऐसे समय आई है जब देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और राज्य अपने स्तर पर निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या-क्या हैं बड़ी रियायतें?
नई नीति में निवेशकों को कई तरह की वित्तीय सहायता दी जाएगी। उद्योग लगाने के लिए सब्सिडी के साथ-साथ बैंक लोन पर भी राहत दी जाएगी।
सरकार ने उत्पादन शुरू होने के बाद सात वर्षों तक 5% ब्याज सब्सिडी देने की घोषणा की है। यह सब्सिडी अधिकतम 25 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
इसके अलावा, पेटेंट फाइल करने पर भी कंपनियों को बड़ा लाभ मिलेगा। देश में पेटेंट के लिए 10 लाख और विदेश में 20 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
सस्ती बिजली और पानी से घटेगा खर्च
नीति की सबसे बड़ी खासियत सस्ती बिजली और पानी है। कंपनियों को सिर्फ 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जाएगी।
बिजली की वास्तविक लागत और तय दर के बीच का अंतर राज्य सरकार वहन करेगी। यह सुविधा 10 वर्षों तक लागू रहेगी।
इसी तरह, पानी की दर भी मात्र 4 रुपये प्रति घन मीटर रखी गई है। इससे उत्पादन लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है।
2030 तक रोजगार और निवेश का बड़ा लक्ष्य
राज्य सरकार ने इस नीति के जरिए 25 हजार करोड़ रुपये निवेश लाने की योजना बनाई है।
सरकार का अनुमान है कि इससे 2030 तक 2 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इसके साथ ही, अगले पांच वर्षों में 50 हजार सेमीकंडक्टर पेशेवर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे युवाओं को हाई-टेक सेक्टर में करियर बनाने का मौका मिलेगा।
बिहार को AI और सेमीकंडक्टर हब बनाने की तैयारी
सरकार ने बिहार को एआई और सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
इसके तहत चिप मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और डिजाइन यूनिट्स स्थापित करने की योजना है। साथ ही मेगा टेक सिटी, फिनटेक सिटी और स्मार्ट सिटी विकसित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।
यह पहल केंद्र सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन से जुड़कर आगे बढ़ाई जाएगी, जिससे बड़े निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।
उद्योग स्थापित करने में कितना आएगा खर्च?
सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश का स्तर काफी बड़ा होता है। एक बड़ी फैब्रिकेशन यूनिट पर 80 हजार करोड़ से 2.5 लाख करोड़ रुपये तक खर्च हो सकता है।
वहीं, पैकेजिंग और टेस्टिंग यूनिट्स पर 7 हजार से 27 हजार करोड़ रुपये तक निवेश की जरूरत होती है।
छोटी सहायक इकाइयों की लागत 10 करोड़ से 50 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है।
क्या बदलेगा बिहार का औद्योगिक परिदृश्य?
यह नीति राज्य के औद्योगिक विकास के लिए अहम मानी जा रही है। सस्ती बिजली-पानी और वित्तीय सहायता से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।
यदि योजना का सही क्रियान्वयन हुआ, तो बिहार हाई-टेक इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट पर भी समान ध्यान देना जरूरी होगा, तभी यह नीति पूरी तरह सफल हो पाएगी।
