बिहार माइनिंग राजस्व में बड़ा झटका: रेड के बाद भी वसूली ढीली

 


रेड के बाद भी वसूली ढीली:बिहार माइनिंग राजस्व में बड़ा झटका

बिहार माइनिंग राजस्व 2025-26 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। बिहार में अवैध खनन पर कार्रवाई पिछले एक साल में तेज रही, लेकिन राजस्व वसूली उम्मीद से कम रही। गुरुवार को पटना में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री विजय सिन्हा और अधिकारियों ने आंकड़े साझा किए। बिहार माइनिंग राजस्व 2025-26 में लक्ष्य का सिर्फ 93% ही हासिल हो पाया। विभाग का कहना है कि अवैध खनन, बाहरी राज्यों से रेत-पत्थर की खरीद और सिस्टम की कमियों के कारण यह गिरावट आई है।

इस खुलासे ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर कर दिया है।


लक्ष्य से पीछे क्यों रह गया विभाग?

बिहार माइनिंग राजस्व 2025-26 में इस बार 3850 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन विभाग सिर्फ 3592 करोड़ रुपये ही जुटा पाया।

पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभाग ने 3500 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 3536 करोड़ रुपये वसूले थे। यानी इस साल प्रदर्शन में गिरावट दर्ज हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में अवैध खनन के बावजूद राजस्व का कम होना सिस्टम की कमजोरियों की ओर इशारा करता है।


50 हजार छापेमारी, फिर भी कम वसूली

अवैध खनन पर कार्रवाई के मामले में विभाग ने रिकॉर्ड बनाया है।

  • 50,000 से ज्यादा छापेमारी
  • 2727 FIR दर्ज
  • 6214 वाहन जब्त
  • 806 लोगों की गिरफ्तारी
  • 82.06 करोड़ रुपये की वसूली

इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद बिहार माइनिंग राजस्व 2025-26 में गिरावट ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

यानी कार्रवाई तो “शेर” जैसी हुई, लेकिन वसूली “ढेर” साबित हुई।


जुर्माने का हिसाब नहीं दे पाए अधिकारी

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विभाग के पास जुर्माने की पूरी जानकारी नहीं है।

नियम के अनुसार, अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों पर 1 लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है।

लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री विजय सिन्हा और विभागीय निदेशक इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए कि कुल कितना जुर्माना वसूला गया।

यह स्थिति प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।


अब ट्रांजिट पास से बढ़ेगा राजस्व?

राजस्व बढ़ाने के लिए विभाग अब नई रणनीति पर काम कर रहा है।

दूसरे राज्यों से आने वाले बालू और पत्थर पर ट्रांजिट पास अनिवार्य किया जाएगा।

सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से अवैध सप्लाई पर रोक लगेगी और राजस्व में सुधार होगा।

इसके साथ ही, राज्य में पत्थर खनन पट्टा जल्द जारी करने की भी योजना है, जिससे बाहरी निर्भरता कम हो सके।


मंत्री का दावा: सिस्टम में सुधार हुआ

मंत्री विजय सिन्हा ने दावा किया कि विभाग में बड़ा बदलाव आया है।

उनके अनुसार:

  • पहले खनन में दबंगई और अव्यवस्था थी
  • अब मॉनिटरिंग बढ़ी है
  • ओवरलोडिंग पर रोक लगी है
  • टेंडर सिस्टम में पारदर्शिता आई है

हालांकि, राजस्व के आंकड़े इन दावों से मेल नहीं खाते दिख रहे हैं।


आम लोगों पर क्या असर?

इस फैसले से लोगों को सीधा असर देखने को मिल सकता है।

यदि ट्रांजिट पास सिस्टम सख्ती से लागू हुआ, तो:

  • निर्माण सामग्री महंगी हो सकती है
  • रियल एस्टेट और छोटे ठेकेदारों की लागत बढ़ सकती है
  • लेकिन लंबे समय में अवैध खनन पर रोक से पर्यावरण को राहत मिलेगी

यानी अल्पकाल में परेशानी, लेकिन दीर्घकाल में संतुलन की उम्मीद है।


आगे क्या है चुनौती?

बिहार माइनिंग राजस्व 2025-26 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि:

  • सिर्फ छापेमारी काफी नहीं
  • प्रभावी वसूली सिस्टम जरूरी
  • डेटा पारदर्शिता बढ़ानी होगी

यदि सरकार इन पहलुओं पर काम करती है, तभी राजस्व लक्ष्य हासिल करना संभव होगा।


Source: विभागीय प्रेस कॉन्फ्रेंस, पटना

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