बिहार अफसरों की संपत्ति पर बड़ा अपडेट: पत्नी आगे, DGP खाली हाथ

 


बिहार में IAS IPS संपत्ति खुलासा ने इस बार कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रख दिए हैं। 31 मार्च को राज्य सरकार के निर्देश पर सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी संपत्ति घोषित की, जिसमें IAS IPS संपत्ति खुलासा के दौरान यह दिखा कि कई अफसरों से ज्यादा उनकी पत्नियां संपन्न हैं। पटना में जारी इस खुलासे में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और DGP विनय कुमार समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। खास बात यह रही कि नकदी के मामले में कई अधिकारी बेहद कम रकम रखते हैं, जबकि बैंक खातों और निवेश में बड़ी राशि जमा है।

क्या है पूरा मामला?

हर साल की तरह इस बार भी बिहार सरकार ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करने को कहा।

31 मार्च की शाम जारी इस रिपोर्ट में IAS और IPS अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति, नकदी, बैंक बैलेंस और निवेश की जानकारी दी गई।

इस बार का खुलासा इसलिए खास बन गया क्योंकि कई मामलों में अधिकारियों की तुलना में उनकी पत्नियों की संपत्ति अधिक पाई गई।

DGP विनय कुमार के पास नहीं है नकदी

बिहार के DGP विनय कुमार के संपत्ति विवरण में सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई।

उनके पास नकद एक रुपये भी नहीं है। हालांकि, उनके बैंक खातों में 32.55 लाख रुपये जमा हैं।

इसके अलावा उनके पास करीब 25 लाख रुपये का सोना और 1.15 लाख रुपये की चांदी है। वाहन के रूप में उनके पास एक i-10 कार है।

नोएडा में उनका एक फ्लैट भी है, जिसे उन्होंने ऋण लेकर खरीदा था और अब चुका दिया है।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की संपत्ति

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के पास नकदी के नाम पर मात्र 15,400 रुपये हैं।

उनके बैंक खाते में करीब 5.5 लाख रुपये और म्यूचुअल फंड में 3.15 लाख रुपये निवेश है।

उनके पास एक पुरानी मारुति एस्टीम कार है और सिर्फ 20 ग्राम सोना है।

हालांकि, उनकी पत्नी उनसे कहीं अधिक संपन्न हैं, जिनके पास करोड़ों की जमा पूंजी और भारी मात्रा में सोना-चांदी है।

पत्नियों की संपत्ति ने खींचा ध्यान

इस बार के खुलासे में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कई अधिकारियों की पत्नियों के पास उनसे ज्यादा संपत्ति है।

मुख्य सचिव की पत्नी के पास बैंक, पीएफ और पीपीएफ में बड़ी राशि जमा है, जिसमें पीपीएफ में ही 3.15 करोड़ रुपये शामिल हैं।

इसके अलावा उनके पास लगभग एक किलो सोना और तीन किलो चांदी भी है।

यह ट्रेंड अन्य अधिकारियों के मामलों में भी देखने को मिला, जिससे यह रिपोर्ट चर्चा में आ गई है।

अन्य अधिकारियों की संपत्ति पर नजर

सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर के पास कृषि और गैर कृषि भूमि है, लेकिन उनके पास सोना नहीं है।

वहीं, उनकी पत्नी के पास 250 ग्राम सोना है।

जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल के पास सीमित नकदी है, लेकिन उन्होंने गोवा में 3.37 करोड़ का मकान खरीदा है।

नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव के पास पटना में फ्लैट और सोनपुर में कृषि भूमि है, जबकि उनकी पत्नी के पास अधिक आभूषण हैं।

निवेश और संपत्ति का बदलता ट्रेंड

इस बार के खुलासे से यह भी स्पष्ट हुआ कि अधिकारी अब नकदी रखने के बजाय बैंक खातों, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

कई अधिकारियों के पास लाखों रुपये बैंक में जमा हैं और करोड़ों का निवेश विभिन्न योजनाओं में किया गया है।

यह ट्रेंड आधुनिक वित्तीय योजना और सुरक्षित निवेश की ओर इशारा करता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खुलासा?

सरकारी अधिकारियों की संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

इससे आम जनता को यह जानकारी मिलती है कि प्रशासनिक अधिकारी किस तरह अपनी आय और संपत्ति का प्रबंधन कर रहे हैं।

इस बार का खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सामाजिक और आर्थिक ट्रेंड भी स्पष्ट रूप से सामने आए हैं।

आगे क्या संकेत मिलते हैं?

इस रिपोर्ट से यह साफ है कि बिहार के अधिकारी पारंपरिक नकदी के बजाय निवेश आधारित संपत्ति पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।

साथ ही, परिवार की संयुक्त संपत्ति में पत्नियों की भूमिका भी मजबूत होती दिख रही है।

आने वाले समय में यह ट्रेंड और बढ़ सकता है, जिससे संपत्ति प्रबंधन का तरीका भी बदलता नजर आएगा।


Source: बिहार सरकार द्वारा जारी संपत्ति विवरण रिपोर्ट

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