
बिहार DSP गौतम कुमार पर कार्रवाई
बिहार DSP गौतम कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोपों में बड़ी कार्रवाई हुई। 31 मार्च 2026 को किशनगंज, पूर्णिया और पटना में EOU ने छापेमारी की। इस कार्रवाई में आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। गौतम कुमार, जो किशनगंज में SDPO पद पर तैनात थे, पर आरोप है कि उन्होंने अपनी वैध आय से कहीं ज्यादा संपत्ति अर्जित की। करीब 10 घंटे चली इस छापेमारी में कई चौंकाने वाले दस्तावेज और निवेश सामने आए।
10 घंटे चली रेड में क्या-क्या मिला?
मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे EOU की टीम तीन गाड़ियों में किशनगंज पहुंची। इसके बाद अलग-अलग टीमों ने एक साथ 6 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की।
करीब 10 घंटे तक चली इस कार्रवाई में 12 अधिकारियों की टीम ने हर दस्तावेज की बारीकी से जांच की।
जांच में सामने आया कि गौतम कुमार ने अपनी आय से 60.27% अधिक संपत्ति अर्जित की है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.94 करोड़ रुपये की अवैध कमाई के शुरुआती साक्ष्य मिले हैं।
आलीशान बंगला और लग्जरी लाइफस्टाइल का खुलासा
छापेमारी के दौरान सबसे बड़ा खुलासा उनकी संपत्तियों को लेकर हुआ।
पूर्णिया में 3600 वर्गफीट में फैला एक चार मंजिला आलीशान बंगला मिला, जिसकी कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इसके अलावा:
- सिलीगुड़ी में चाय बागान में निवेश
- थार और क्रेटा जैसी लग्जरी गाड़ियां
- महंगी घड़ियों का कलेक्शन
- नोएडा और गुड़गांव में संपत्ति के सबूत
सरकारी आवास से करीब 1.37 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए।
25 प्लॉट और बेनामी संपत्ति का जाल
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला कि गौतम कुमार ने अपनी संपत्तियां सीधे अपने नाम पर नहीं रखीं।
करीब 25 जमीन के प्लॉट का खुलासा हुआ है, जिनमें से कई उनकी पत्नी पूनम देवी और महिला मित्र शगुफ्ता शमीम के नाम पर हैं।
पूर्णिया में शगुफ्ता शमीम के घर से 7 प्लॉट के दस्तावेज मिले, जिनकी कीमत 60 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।
इसी आधार पर जांच एजेंसी ने दोनों को सह-आरोपी बनाया है।
तस्करों से संबंध और फर्जी सिम का इस्तेमाल
जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है।
बताया जा रहा है कि गौतम कुमार के संबंध:
- कोयला तस्करों
- शराब माफिया
- सुपारी गिरोह
- लॉटरी नेटवर्क
से रहे हैं।
इसके अलावा, वे कथित तौर पर फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे, ताकि उनकी गतिविधियां ट्रैक न हो सकें।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
इस कार्रवाई की शुरुआत 29 मार्च 2026 को हुई, जब पटना में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई।
इसके बाद विशेष निगरानी अदालत से सर्च वारंट लेकर 31 मार्च को एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की गई।
अब EOU टीम सभी दस्तावेजों और निवेश की गहराई से जांच कर रही है।
संभावना है कि इस केस में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
आम जनता पर क्या असर?
इस फैसले से लोगों को यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है।
आम जनता के बीच यह विश्वास मजबूत होता है कि सिस्टम में जवाबदेही बनी हुई है।
हालांकि, ऐसे मामलों से पुलिस व्यवस्था की साख पर सवाल भी खड़े होते हैं।
आगे क्या होगा?
जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में:
- और संपत्तियों का खुलासा हो सकता है
- अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है
- कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है
गौतम कुमार की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
Source: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट