बिहार सीओ हड़ताल पर विजय सिन्हा के बयान से भड़के सीओ, टकराव तेज

 


बिहार CO हड़ताल:

बिहार में चल रही बिहार CO हड़ताल को लेकर नया विवाद सामने आया है। पिछले 25 दिनों से अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व पदाधिकारी हड़ताल पर हैं। इस बिहार CO हड़ताल के बीच डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के बयान पर अधिकारियों ने आपत्ति जताई है। शनिवार को संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि “इलाज करने वाली धमकी” जैसी भाषा से संवाद संभव नहीं है। यह विवाद तब बढ़ा जब सरकार ने सख्ती दिखाते हुए सेवा टूट और सैलरी कट की चेतावनी दी।

विजय सिन्हा के बयान पर क्यों भड़के अधिकारी

डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा लगातार हड़ताली अधिकारियों को काम पर लौटने की अपील कर रहे हैं।

हालांकि, उनके बयान में इस्तेमाल शब्दों को लेकर नाराजगी बढ़ गई है।
अधिकारियों का कहना है कि उन्हें “बीमार” बताना और “इलाज” करने जैसी भाषा अपमानजनक है।

संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता आदित्य शिवम शंकर ने साफ कहा कि:

  • सरकार से टकराव नहीं चाहते
  • लेकिन सम्मानजनक संवाद जरूरी है
  • धमकी भरी भाषा से समाधान नहीं निकलेगा

25 दिनों की हड़ताल का क्या असर पड़ा

हड़ताल का सबसे बड़ा असर जमीन और राजस्व से जुड़े कामों पर पड़ा है।

संघ के आंकड़ों के अनुसार:

  • 9 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 15,849 मामले आए
  • इनमें से सिर्फ 604 मामलों का निपटारा हुआ
  • करीब 15,220 मामले अभी भी लंबित हैं

यानी सिर्फ 4% मामलों का ही समाधान हो पाया है।

इसके विपरीत, पिछले साल इसी अवधि में:

  • 92,763 मामले आए थे
  • 81,313 मामलों का निपटारा हुआ था

इस तुलना से साफ है कि मौजूदा हड़ताल ने व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

सरकार और अधिकारियों के बीच टकराव क्यों बढ़ा

सरकार का कहना है कि कई अधिकारी काम पर लौट आए हैं, लेकिन कुछ अब भी हड़ताल जारी रखे हुए हैं।

सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि:

  • हड़ताली अधिकारी दूसरों को काम पर लौटने से रोक रहे हैं
  • काम पर लौटे अधिकारियों को प्रभावित किया जा रहा है

इसी कारण सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।

आम लोगों पर क्या पड़ रहा असर

इस विवाद का सीधा असर आम जनता पर दिख रहा है।

प्रमुख समस्याएं:

  • जमीन रजिस्ट्रेशन में देरी
  • दाखिल-खारिज के मामले अटके
  • प्रमाणपत्र और अन्य राजस्व सेवाएं बाधित

कई जिलों में लोग हफ्तों से अपने काम के लिए भटक रहे हैं, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।

समाधान के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए

स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की है।

सरकार के कदम:

  • अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया
  • रिटायर्ड राजस्व अधिकारियों को संविदा पर नियुक्त करने का फैसला
  • कामकाज को आंशिक रूप से बहाल करने की कोशिश

हालांकि, ये कदम अभी पूरी तरह असरदार साबित नहीं हुए हैं।

क्या बातचीत से निकलेगा रास्ता?

हड़ताली अधिकारियों का साफ कहना है कि समस्या का समाधान केवल संवाद से ही संभव है।

उनकी मांग है:

  • सम्मानजनक बातचीत
  • मांगों पर गंभीर विचार
  • दबाव या धमकी की राजनीति खत्म हो

दूसरी ओर, सरकार चाहती है कि अधिकारी पहले काम पर लौटें, फिर बातचीत हो।


Source: हड़ताली संघ के बयान, सरकारी इनपुट व स्थानीय रिपोर्ट्स

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