Bhabua News: 4 बच्चे छिपाने पर गई कुर्सी, चेयरमैन विकास तिवारी हटे

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कैमूर में Bhabhua Chairman removal को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। इस Bhabhua Chairman removal मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने भभुआ नगर परिषद के चेयरमैन विकास कुमार तिवारी को पद से हटा दिया है। आयोग ने जांच के बाद पाया कि उन्होंने चुनाव के दौरान गलत हलफनामा दाखिल किया और महत्वपूर्ण जानकारी छुपाई थी।

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और नगर परिषद के कामकाज को लेकर भी नए सवाल उठने लगे हैं।

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद चुनावी हलफनामे से जुड़ा है। आरोप था कि विकास तिवारी ने अपने नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी।

पूर्व चेयरमैन जैनेंद्र कुमार आर्य उर्फ जॉनी आर्य ने शिकायत करते हुए कहा था कि तिवारी ने दो से अधिक बच्चों की जानकारी छिपाई।

बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 के अनुसार, 2008 के बाद दो से अधिक संतान होने पर चुनाव लड़ने की पात्रता समाप्त हो जाती है।

जांच में क्या सामने आया?

शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की गई। कैमूर जिला प्रशासन, डीएम और डीडीसी स्तर पर भी इसकी पुष्टि हुई।

जांच में पाया गया कि विकास तिवारी ने अपने हलफनामे में बच्चों की संख्या को लेकर गलत जानकारी दी थी।

आरोपों की पुष्टि होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने उन्हें पद से हटाने का आदेश जारी किया।

“चार बच्चे थे, लेकिन जानकारी छुपाई गई”

शिकायतकर्ता जॉनी आर्य का दावा है कि विकास तिवारी के चार बच्चे हैं, लेकिन उन्होंने नामांकन के दौरान इसे छुपाया।

आर्य के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया के दौरान गलत तथ्यों के आधार पर उन्होंने जीत हासिल की, जो नियमों का उल्लंघन है।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से यह मामला कोर्ट में चल रहा था और अब जाकर न्याय मिला है।

10 महीने बाद आया फैसला

जैनेंद्र आर्य ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर पटना कोर्ट में भी याचिका दायर की थी।

करीब 10 महीने की प्रक्रिया के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने अंतिम फैसला सुनाया और विकास तिवारी को पद से हटा दिया।

इस फैसले को शिकायतकर्ता ने न्याय की जीत बताया है।

कार्यकाल पर भी उठे सवाल

जॉनी आर्य ने विकास तिवारी के कार्यकाल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में नगर परिषद क्षेत्र में साफ-सफाई की स्थिति खराब रही।

इसके अलावा, शहर के प्रमुख स्थल राजेंद्र सरोवर के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं?

बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 के तहत, 4 अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक संतान होने पर व्यक्ति स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है।

इस नियम का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।

यदि कोई उम्मीदवार गलत जानकारी देता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है।

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