विक्रमशिला सेतु पर बड़ा खतरा! पिलर दीवार ढही, सरकार पर झटका

 

पूर्वी बिहार की जीवनरेखा विक्रमशिला सेतु इस समय गंभीर खतरे में है। भागलपुर में स्थित इस अहम पुल की सुरक्षा दीवार ढहने की घटना हाल ही में सामने आई है जिस पर प्रशासन और विपक्ष आमने-सामने हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, विक्रमशिला सेतु की बिगड़ती हालत का कारण समय पर मरम्मत न होना और संरचनात्मक कमजोरी है जबकि अब डीएम के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। विक्रमशिला सेतु से रोज लाखों लोग गुजरते हैं, ऐसे में यह खबर बेहद अहम बन गई है।

इस घटनाक्रम ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस फैसले से लोगों को डर सता रहा है कि कहीं अचानक कोई बड़ा हादसा न हो जाए।


पिलर की सुरक्षा दीवार ढही, बढ़ा खतरा

गंगा नदी पर बने इस ऐतिहासिक पुल के पिलरों को सुरक्षित रखने वाली प्रोटेक्शन वॉल अचानक टूटने लगी है। खासकर पिलर नंबर 16 से 20 के बीच की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है।

दीवार का बड़ा हिस्सा अब पिलर से लटक रहा है और लगातार उससे टकरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो पिलरों की मजबूती पर सीधा असर पड़ सकता है।

छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है।


एक्सपेंशन जॉइंट्स का गैप 6 इंच तक पहुंचा

पुल की हालत का एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पिछले दो साल में एक्सपेंशन जॉइंट्स का गैप 2 इंच से बढ़कर 6 इंच तक पहुंच गया है।

यह संकेत देता है कि पुल के स्ट्रक्चर में गंभीर समस्या हो सकती है। अगर समय रहते इसे ठीक नहीं किया गया, तो यह आवागमन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह का गैप बढ़ना पुल की स्थिरता के लिए अच्छा संकेत नहीं है।


प्रशासन ने जांच के दिए आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए भागलपुर के डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने तुरंत संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जांच का निर्देश दिया है।

डीएम के मुताबिक, रिपोर्ट आने के बाद जरूरत पड़ी तो एक्सपर्ट कमेटी बुलाई जाएगी। उसी के आधार पर मरम्मत और यातायात को लेकर फैसला लिया जाएगा।

प्रशासन का यह कदम राहत जरूर देता है, लेकिन लोगों को तत्काल समाधान की उम्मीद है।


विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री हाल ही में भागलपुर आए, लेकिन उन्होंने इस पुल की खराब स्थिति पर ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप है कि पुल निर्माण निगम पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समानांतर फोर-लेन पुल का निर्माण भी बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिससे समस्या और बढ़ रही है।


मानसून में बढ़ सकता है खतरा

जानकारों के अनुसार, अगर जल्द मरम्मत नहीं हुई तो मानसून के दौरान स्थिति और बिगड़ सकती है।

गंगा का जलस्तर बढ़ने से पिलरों के आसपास मिट्टी का कटाव तेज हो सकता है। इससे पुल की नींव कमजोर पड़ सकती है, जो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

यह स्थिति प्रशासन के लिए अलर्ट सिग्नल है।


आम लोगों पर क्या होगा असर?

विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। यह पूर्वी बिहार और सीमांचल को जोड़ने वाली मुख्य कड़ी है।

अगर इस पुल पर यातायात प्रभावित होता है, तो लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर पड़ेगा।

इस खबर ने लोगों के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।


क्या हो सकता है आगे?

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। अगर रिपोर्ट में गंभीर खामियां सामने आती हैं, तो पुल पर आवागमन सीमित या बंद भी किया जा सकता है।

सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह समय रहते कदम उठाए और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

Source: स्थानीय प्रशासनिक जानकारी एवं मीडिया रिपोर्ट्स

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