सिमुलतला स्कूल फिर बना टॉपर्स फैक्ट्री, पुष्पांजलि 98.4% से टॉपर

 


बिहार मैट्रिक रिजल्ट 2026 में सिमुलतला स्कूल टॉपर्स फैक्ट्री की पहचान एक बार फिर मजबूत हुई है। बिहार बोर्ड द्वारा घोषित इस रिजल्ट में जमुई स्थित सिमुलतला आवासीय विद्यालय की छात्रा पुष्पांजलि कुमारी ने 98.4% अंक हासिल कर टॉपर बनकर नया रिकॉर्ड बनाया। यह परिणाम 2026 में जारी हुआ, जहां कई वर्षों से इस स्कूल के छात्र टॉप सूची में शामिल होते रहे हैं। सिमुलतला स्कूल टॉपर्स फैक्ट्री कहलाने के पीछे इसकी सख्त पढ़ाई, अनुशासन और विशेष शिक्षण पद्धति प्रमुख कारण हैं।

सिमुलतला की छात्रा पुष्पांजलि बनी टॉपर

जमुई जिले के सिमुलतला आवासीय विद्यालय की छात्रा पुष्पांजलि कुमारी ने 492 अंक हासिल कर राज्य में टॉप किया। वह वैशाली की सबरीन परवीन के साथ संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहीं।

पुष्पांजलि मूल रूप से बांका जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और सिमुलतला स्कूल के शिक्षकों को दिया। उनका कहना है कि उन्होंने पूरे साल रोजाना 15 घंटे तक पढ़ाई की।

उन्होंने आगे बताया कि स्कूल से लौटने के बाद भी उनके पिता उन्हें पढ़ाते थे। भविष्य में वह साइंस स्ट्रीम लेकर वैज्ञानिक बनना चाहती हैं।

इस साल बेटियों ने फिर लहराया परचम

बिहार बोर्ड के इस साल के रिजल्ट में एक बार फिर छात्राओं का दबदबा देखने को मिला। टॉप 10 में कई छात्राओं ने अपनी जगह बनाई।

कुल 14 मेधावी छात्रों में 8 छात्राएं शामिल हैं, जो यह दिखाता है कि बेटियां लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। राज्यभर में कुल 81.79% छात्र सफल घोषित हुए हैं।

सिमुलतला विद्यालय के ही अभिनव कुमार (485 अंक) और सुरभि सिंह (481 अंक) ने भी टॉप 10 में जगह बनाकर स्कूल का नाम रोशन किया।

क्यों कहा जाता है सिमुलतला ‘टॉपर्स फैक्ट्री’?

सिमुलतला आवासीय विद्यालय को ‘टॉपर्स फैक्ट्री’ कहना यूं ही नहीं है। इसके पीछे कई वर्षों का शानदार रिजल्ट रिकॉर्ड है।

  • 2015 में टॉप 10 के सभी 31 छात्र इसी स्कूल से थे
  • 2016 में टॉप 42 में सभी छात्र इसी विद्यालय के थे
  • 2017–2019 के बीच भी अधिकतर टॉपर्स यहीं से आए
  • 2021 से 2024 तक हर साल बड़ी संख्या में छात्र टॉप सूची में रहे

इन आंकड़ों से साफ है कि यह स्कूल लगातार टॉपर्स देने में अग्रणी रहा है।

सिमुलतला स्कूल की शुरुआत कैसे हुई?

वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद नेतरहाट और इंदिरा गांधी आवासीय विद्यालय झारखंड में चले गए। इससे बिहार में गुणवत्तापूर्ण आवासीय स्कूल की कमी महसूस हुई।

इसके बाद राज्य सरकार ने नए आवासीय विद्यालय की योजना बनाई। अगस्त 2009 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों से सिमुलतला आवासीय विद्यालय की नींव रखी गई।

यह एक सह-शिक्षा (Co-education) स्कूल है, जहां लड़के और लड़कियां साथ पढ़ते हैं और प्रतियोगी माहौल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

CM नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट

सिमुलतला स्कूल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। यहां अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होती है और छात्रों का चयन कठिन प्रवेश परीक्षा के जरिए किया जाता है।

2009 में इस परियोजना की शुरुआत हुई और 2010 में इसका उद्घाटन किया गया। पहले बैच में 120 छात्रों का चयन हुआ था।

यहां छात्रों को आधुनिक सुविधाएं, हॉस्टल, अनुशासित दिनचर्या और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलता है।

प्रवेश प्रक्रिया और पढ़ाई का स्तर

सिमुलतला स्कूल में दाखिला आसान नहीं है। इसके लिए राज्य स्तर की प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है।

चयनित छात्रों को यहां आवासीय सुविधा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती है। यही कारण है कि यहां के छात्र बोर्ड परीक्षाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

अनुशासन, नियमित टेस्ट, गाइडेंस और सेल्फ-स्टडी का संतुलन इस स्कूल की सबसे बड़ी ताकत है।

सफलता का मंत्र: मेहनत + मार्गदर्शन

पुष्पांजलि की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी छात्र बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है।

सिमुलतला स्कूल का माहौल छात्रों को प्रतियोगी बनाता है और उन्हें लक्ष्य के प्रति केंद्रित रखता है। यही वजह है कि यह स्कूल आज भी बिहार का सबसे भरोसेमंद टॉपर्स हब बना हुआ है।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स एवं बिहार बोर्ड आंकड़े

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