Rupali Chakankar: क्या, कब, क्यों हुआ इस्तीफा?
Rupali Chakankar महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय सुर्खियों में आईं जब उन्होंने अशोक खरात विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम हाल ही में नासिक और मुंबई में सामने आया, जहां जांच तेज होने के साथ राजनीतिक दबाव भी बढ़ा। Rupali Chakankar ने महिला आयोग की अध्यक्ष और बाद में NCP महिला विंग के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने यह कदम निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और बढ़ते विवाद के बीच अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए उठाया।
अशोक खरात विवाद क्या है?
नासिक के तथाकथित ‘भोंदू बाबा’ अशोक खरात का मामला महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
जांच के दौरान महिलाओं के शोषण, ब्लैकमेलिंग और अन्य गंभीर आरोप सामने आए हैं।
इस केस से जुड़े वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की।
इसी कड़ी में रूपाली चाकणकर का नाम भी सामने आया, क्योंकि वे खरात की संस्था ‘श्री शिवनिका संस्थान मिरगांव’ से जुड़ी बताई गईं।
क्यों छोड़नी पड़ी महिला आयोग की कुर्सी?
रूपाली चाकणकर अक्टूबर 2021 में पहली बार महिला आयोग की अध्यक्ष बनी थीं और अक्टूबर 2024 में दोबारा इस पद पर आईं।
लेकिन विवाद बढ़ने और विपक्ष के दबाव के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि वे चाहती हैं कि इस मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस पूरे मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
NCP पद से भी इस्तीफा, बढ़ा राजनीतिक दबाव
महिला आयोग के बाद रूपाली चाकणकर ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की महिला विंग के प्रदेश अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद यह फैसला लिया।
बताया जा रहा है कि पार्टी के अंदर भी उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा था, जिसके चलते यह कदम उठाया गया।
राजनीतिक हलकों में इस इस्तीफे को बड़ा झटका माना जा रहा है।
रूपाली चाकणकर कौन हैं? जानें प्रोफाइल
रूपाली चाकणकर का जन्म 31 मई 1982 को पुणे के हडपसर में हुआ था।
उन्होंने एमबीए तक की पढ़ाई की है और राजनीति में आने से पहले सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं।
उनकी शुरुआती पढ़ाई साधना कॉलेज से हुई और वे मूल रूप से दौंड की रहने वाली हैं।
परिवार की बात करें तो—
- पिता: बबनराव बोराटे
- माता: पार्वती बोरटे
- पति: निलेश चाकणकर (बिजनेसमैन)
उनका एक बेटा भी है।
राजनीति में कैसे हुई एंट्री?
रूपाली चाकणकर का राजनीति में कोई सीधा पारिवारिक बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन उनके ससुराल पक्ष का राजनीतिक जुड़ाव रहा है।
उनकी सास रुक्मिणी चाकणकर NCP से कॉर्पोरेटर रह चुकी हैं।
इसी के जरिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा और महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ काम करते हुए अपनी पहचान बनाई।
बाद में उन्हें खड़कवासला विधानसभा क्षेत्र इकाई का अध्यक्ष बनाया गया, जहां से उनकी राजनीतिक यात्रा को गति मिली।
खुद पर लगे आरोपों पर क्या कहा?
रूपाली चाकणकर ने अपने इस्तीफे में साफ कहा कि उनका अशोक खरात के किसी भी कथित गलत काम से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि—
- वे खरात को एक ‘गुरु’ के रूप में मानती थीं
- लेकिन उनके कार्यों से पूरी तरह अनजान थीं
उन्होंने यह भी कहा कि बिना सबूत लगाए जा रहे आरोप उन्हें मानसिक रूप से आहत कर रहे हैं और सच्चाई जल्द सामने आएगी।
जांच और आगे की स्थिति
रूपाली चाकणकर ने मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं और पार्टी नेतृत्व इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
निष्कर्ष: सियासत में बढ़ा दबाव, जांच पर टिकी नजर
अशोक खरात विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा असर डाला है।
रूपाली चाकणकर का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि राजनीतिक दबाव और सार्वजनिक छवि का असर कितना गहरा होता है।
हालांकि उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है, लेकिन अब पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
Source: मीडिया रिपोर्ट्स
