बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी तापमान चरम पर है। क्या हो रहा है, कब नामांकन होगा, कहां से उम्मीदवार उतरेंगे, कौन दावेदार है, क्यों बढ़ी हलचल और कैसे तय होगा समीकरण—इन सवालों के केंद्र में यही राज्यसभा चुनाव 2026 है। सूबे की पांच सीटों के लिए नामांकन में अब केवल दो दिन बचे हैं। सोमवार और गुरुवार आखिरी मौके होंगे, क्योंकि बीच में होली की छुट्टियां पड़ रही हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, किसी दल ने अभी तक आधिकारिक नाम घोषित नहीं किए हैं।
नामांकन की डेडलाइन और संभावित रणनीति
चुनाव प्रक्रिया के अनुसार 5 मार्च को नामांकन की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अंतिम दिन ही बड़े चेहरे पर्चा दाखिल करेंगे। इससे आखिरी समय में रणनीतिक बदलाव की गुंजाइश बनी रहेगी।
16 मार्च को मतदान प्रस्तावित है। ऐसे में अगले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।
NDA में सीट बंटवारे का गणित
विधानसभा की मौजूदा दलीय स्थिति को देखें तो Bharatiya Janata Party और Janata Dal (United) के दो-दो उम्मीदवारों के निर्विरोध जीतने का अनुमान लगाया जा रहा है।
पांचवीं सीट के लिए NDA को अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।
चर्चा है कि इस सीट पर मौजूदा सांसद Upendra Kushwaha को दोबारा मौका मिल सकता है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
जदयू कोटे से केंद्रीय मंत्री Ramnath Thakur, पूर्व आईएएस मनीष वर्मा और हर्षवर्धन सिंह जैसे नाम चर्चा में हैं। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की बैठक के बाद होगा।
भाजपा की रणनीति पर नजर
भाजपा दो उम्मीदवार उतार सकती है।
सूत्रों के अनुसार पार्टी सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश में है। एक अति पिछड़ा और एक सवर्ण चेहरे को टिकट देने की संभावना पर चर्चा है।
हालांकि पार्टी नेतृत्व की अंतिम मुहर के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि भाजपा अक्सर अंतिम क्षणों में चौंकाने वाले नाम घोषित करती है।
मांझी की डिमांड से बढ़ा दबाव
इस चुनावी समीकरण में केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है।
गया में उन्होंने सार्वजनिक रूप से 2024 लोकसभा चुनाव से पहले किए गए राज्यसभा सीट के वादे की याद दिलाई।
मांझी का तर्क है कि उन्होंने NDA के लिए लोकसभा सीट जीती, इसलिए राज्यसभा में प्रतिनिधित्व उनका अधिकार है।
उनकी इस मांग ने गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे के गणित को जटिल बना दिया है।
अगर उन्हें समायोजित किया जाता है, तो किसी अन्य दावेदार का समीकरण प्रभावित हो सकता है।
विपक्ष में तेजस्वी पर सस्पेंस
विपक्षी खेमे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या Tejashwi Yadav को राज्यसभा भेजा जाएगा?
हालांकि पार्टी सूत्रों ने फिलहाल इन अटकलों से इनकार किया है, लेकिन राजनीति में संभावनाएं अंतिम क्षण तक बनी रहती हैं।
Rashtriya Janata Dal के खाते में एक सीट तय मानी जा रही है।
अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व की सहमति से ही होगा।
विश्लेषक मानते हैं कि विपक्षी एकजुटता और रणनीतिक वोटिंग यहां अहम भूमिका निभा सकती है।
क्या संकेत देता है यह चुनाव?
राज्यसभा चुनाव केवल सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं है।
यह गठबंधन के भीतर ताकत संतुलन, सामाजिक समीकरण और नेतृत्व की प्राथमिकताओं का संकेत भी देता है।
अगर NDA पांचवीं सीट निकाल लेता है, तो यह उसकी एकजुटता का संदेश होगा।
वहीं विपक्ष अगर रणनीतिक चाल चलता है, तो राजनीतिक संतुलन में बदलाव संभव है।
आगे क्या देखें?
नामांकन के अंतिम दिन तक तस्वीर बदल सकती है।
गठबंधन के अंदर बातचीत, सीटों का संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व—ये तीन फैक्टर निर्णायक रहेंगे।
बिहार की राजनीति में अक्सर अंतिम क्षणों में बड़ा फैसला सामने आता है।
ऐसे में राज्यसभा चुनाव 2026 केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संकेतक भी साबित हो सकता है।
Source: निर्वाचन कार्यक्रम और राजनीतिक दलों के सार्वजनिक बयान
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