पटना स्थित Patna University में हुए PUSU Election के नतीजे शनिवार देर रात घोषित हुए। क्या हुआ, कब हुआ, कहां हुआ, किसने जीता और कैसे जीता—इन सभी सवालों का जवाब इस PUSU Election में साफ दिखा। तेज प्रताप यादव की पार्टी से समर्थित तीन उम्मीदवारों ने अलग-अलग कॉलेजों में जीत दर्ज की। रिजल्ट आते ही जश्न शुरू हुआ, तस्वीरें साझा की गईं और देर रात होली मनाई गई। हालांकि काउंटिंग के दौरान पारदर्शिता को लेकर विवाद भी सामने आया।
तीन सीटों पर छात्र जनशक्ति जनता दल का प्रदर्शन
इस चुनाव में छात्र जनशक्ति जनता दल से समर्थित उम्मीदवारों ने महत्वपूर्ण पदों पर जीत दर्ज की।
आरुष आर्यन ने पटना साइंस कॉलेज में पीजी काउंसलर पद पर बाजी मारी।
सौरव नारायण यादव ने पटना लॉ कॉलेज में अध्यक्ष पद जीता।
वहीं डी.के. प्रताप ने पटना साइंस कॉलेज में यूजी काउंसलर पद पर सफलता हासिल की।
तीन अलग-अलग पदों पर मिली जीत ने संगठन को कैंपस राजनीति में नई मजबूती दी है।
तेज प्रताप यादव ने दी बधाई, शेयर की तस्वीरें
इस जीत के बाद Tej Pratap Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर उम्मीदवारों को बधाई दी।
उन्होंने विजेताओं के साथ तस्वीरें शेयर कीं और इसे संगठन के लिए “गौरव का क्षण” बताया।
पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ऐतिहासिक मतों से मिली जीत छात्र राजनीति में नए विश्वास का प्रतीक है।
देर रात पार्टी समर्थकों ने रंग-गुलाल के साथ जीत का जश्न मनाया और मिठाइयां बांटीं।
जीत के बाद जश्न, देर रात मनाई होली
रिजल्ट घोषित होते ही समर्थकों में उत्साह देखा गया।
देर रात तक कैंपस के बाहर जश्न चलता रहा।
समर्थकों ने रंग लगाकर और ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का उत्सव मनाया।
हालांकि प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने की अपील भी की गई।
काउंटिंग के दौरान हंगामा, पारदर्शिता पर सवाल
एक ओर जहां तीन उम्मीदवारों की जीत से खुशी का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर काउंटिंग प्रक्रिया को लेकर विवाद भी सामने आया।
तेज प्रताप की पार्टी से जुड़े उम्मीदवार रिंकल यादव ने मतगणना में पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप लगाया।
उन्होंने काउंटिंग सेंटर पर विरोध जताया, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और उन्हें बाहर किया।
इससे पहले मतदान के दौरान भी दोपहर में हंगामा हुआ था, जिसमें पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी थी।
छात्र राजनीति में क्या मायने?
PUSU Election के ये नतीजे कई संकेत देते हैं।
पहला, छात्र राजनीति में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव अभी भी मजबूत है।
दूसरा, कॉलेज-स्तर की सीटों पर स्थानीय मुद्दे और व्यक्तिगत पहचान भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
तीसरा, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि छात्रसंघ चुनाव भविष्य की राजनीति की प्रयोगशाला माने जाते हैं। ऐसे में इन परिणामों को व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जाएगा।
आगे की राह
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जीते हुए प्रतिनिधि कैंपस के मुद्दों—जैसे अकादमिक सुविधाएं, छात्रावास, सुरक्षा और प्लेसमेंट—पर कितना ध्यान देते हैं।
छात्रों की अपेक्षा है कि चुनावी वादे जमीन पर उतरें।
साथ ही प्रशासन से पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग भी उठ रही है।
PUSU Election ने एक बार फिर साबित किया कि छात्र राजनीति में हर सीट और हर वोट का महत्व है।
Source: विश्वविद्यालय स्तर पर घोषित आधिकारिक चुनाव परिणाम और सार्वजनिक सोशल मीडिया पोस्ट
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