पटना में चर्चित पटना NEET छात्रा मौत मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। क्या हुआ, कब सुनवाई हुई, कहां मामला चल रहा है, किसकी जमानत पर बहस हुई, क्यों फैसला टला और आगे क्या होगा—इन सभी सवालों के बीच पटना NEET छात्रा मौत मामला में 2 मार्च को विशेष अदालत में अहम सुनवाई हुई। शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर करीब पौने दो घंटे बहस चली। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अब 11 मार्च को CBI के मजिस्ट्रेट कोर्ट में अगली सुनवाई होगी। तब तक आरोपी जेल में ही रहेंगे।
यह मामला जनवरी से लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
जमानत याचिका पर सुनवाई में क्या हुआ?
विशेष अदालत में जमानत याचिका पर विस्तृत बहस हुई।
पीड़ित परिवार के वकील ने जांच में लापरवाही के आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही मामले को सही दिशा में नहीं लिया गया।
इस पर CBI के वकील ने आपत्ति जताई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंच जमानत पर विचार का है, जांच एजेंसी की कार्यशैली पर बहस का नहीं।
CBI ने लिखित रूप से अदालत को बताया कि फिलहाल जांच के लिए मनीष रंजन की हिरासत आवश्यक नहीं है।
हालांकि, अदालत ने तत्काल राहत नहीं दी और फैसला सुरक्षित रख लिया।
अब आगे क्या होगा?
कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा है।
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को CBI के मजिस्ट्रेट कोर्ट में होगी।
तब तक शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।
इस बीच होली का त्योहार भी उन्हें जेल में ही बिताना होगा।
केस की टाइमलाइन: अब तक क्या-क्या हुआ?
यह मामला जनवरी की शुरुआत से सुर्खियों में है।
नीचे प्रमुख घटनाक्रम क्रमवार दिए जा रहे हैं:
5 जनवरी: छात्रा घर से हॉस्टल लौटी।
6 जनवरी: सुबह कमरे में बेहोश मिलीं। पहले स्थानीय अस्पताल, फिर ‘प्रभात मेमोरियल’ शिफ्ट।
9 जनवरी: हालत गंभीर होने पर ‘मेदांता अस्पताल’ भेजा गया।
11 जनवरी: इलाज के दौरान छात्रा की मौत।
12 जनवरी: पोस्टमार्टम हुआ। शाम को परिजनों ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
13 जनवरी: कारगिल चौक पर शव रखकर प्रदर्शन। 6 नामजद और 150 अज्ञात पर केस दर्ज। हॉस्टल में तोड़फोड़।
15 जनवरी: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि।
16 जनवरी: गृह मंत्री ने संज्ञान लिया, SIT का गठन।
17–19 जनवरी: SIT ने परिजनों से पूछताछ, हॉस्टल कमरा सील।
24 जनवरी: फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया।
26 जनवरी: 25 लोगों के DNA सैंपल लिए गए।
27 जनवरी: डिप्टी CM ने परिवार से मुलाकात की।
30 जनवरी: छात्रा की मां ने पुलिस पर ‘सुसाइड’ बताने के दबाव का आरोप लगाया।
31 जनवरी: मुख्यमंत्री ने CBI जांच की सिफारिश की।
8 फरवरी: जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन।
12 फरवरी: CBI ने आधिकारिक रूप से केस दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली।
जांच में अब तक क्या सामने आया?
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में जबरदस्ती की पुष्टि हुई।
हालांकि, DNA जांच की शुरुआती रिपोर्ट में 18 सैंपल में से किसी का मैच नहीं हुआ।
CBI अब स्वतंत्र रूप से साक्ष्य और बयान जुटा रही है।
जांच का फोकस हॉस्टल प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और घटनाक्रम की परिस्थितियों पर है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
मामले ने राज्य में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की।
सड़क पर प्रदर्शन हुए और सोशल मीडिया पर भी बहस तेज रही।
सरकार ने SIT से लेकर CBI जांच तक कई कदम उठाए।
विपक्ष ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
परिवार की मांग क्या है?
पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष और तेज जांच की मांग कर रहा है।
परिजनों का कहना है कि सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिले।
उन्होंने जांच एजेंसियों पर शुरुआती चरण में दबाव और लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं।
Source: अदालत की कार्यवाही और आधिकारिक जांच अपडेट पर आधारित जानकारी
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