50% आरक्षण से लेकर शराबबंदी तक: नीतीश कुमार के 10 अहम कदमों ने बदली बिहार की सूरत

 


बिहार में बदलाव की कहानी: नीतीश कुमार के अहम फैसले

नीतीश कुमार के बड़े फैसले पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति और सामाजिक ढांचे में चर्चा का विषय रहे हैं। बिहार में महिलाओं के सशक्तीकरण, सामाजिक सुधार और कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। इन नीतीश कुमार के बड़े फैसलों में पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण, शराबबंदी कानून, जीविका योजना और महिला रोजगार योजनाएं शामिल हैं। इन फैसलों को 2005 के बाद बिहार में लागू किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, आर्थिक स्थिति मजबूत करना और सामाजिक कुरीतियों को कम करना था।

सरकार का दावा है कि इन नीतियों से राज्य में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ और सामाजिक बदलाव की नई दिशा बनी। गांव से लेकर शहर तक महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता बढ़ने की बात कही जाती है।


पंचायतों में 50% आरक्षण: महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

नीतीश कुमार सरकार का सबसे चर्चित फैसला पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देना रहा। यह निर्णय बिहार में पहली बार लागू किया गया था।

इस फैसले के बाद स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी। आज बिहार में पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 55 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

बिहार के इस मॉडल को बाद में कई राज्यों ने अपनाया। इनमें आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा और उत्तराखंड जैसे राज्य शामिल हैं।


सरकारी नौकरियों और पुलिस में महिला आरक्षण

महिलाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर देने के लिए बिहार सरकार ने कई नीतिगत बदलाव किए। वर्ष 2013 में बिहार पुलिस में 35 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया गया।

इस नीति के बाद राज्य के पुलिस बल में महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी। वर्तमान में बिहार पुलिस में करीब 30 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं और महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 31 हजार से अधिक बताई जाती है।

इसके अलावा 2016 से सरकारी सेवाओं में भी महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया। इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में भी लड़कियों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया।


‘जीविका दीदी’ मॉडल: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली ताकत

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए वर्ष 2006 में ‘जीविका’ परियोजना शुरू की गई। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और छोटे व्यवसाय से जोड़ा गया।

आज बिहार में 1 करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं ‘जीविका दीदी’ के रूप में काम कर रही हैं। वे 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं।

इस मॉडल की सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को पूरे देश में लागू किया।


मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना

महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की।

2025 में शुरू हुई इस योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक करीब 1.81 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि भेजी जा चुकी है।

जो महिलाएं अपना कारोबार शुरू करना या बढ़ाना चाहती हैं, उन्हें दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने का भी प्रावधान किया गया है।


कन्या उत्थान योजना से शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार

लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कन्या उत्थान योजना शुरू की गई। इस योजना का उद्देश्य जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक लड़कियों को आर्थिक सहायता देना है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार इस योजना के बाद जन्म पंजीकरण दर में वृद्धि हुई है।

इसके साथ ही अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है। जहां 2006-07 में केवल 4 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक बताया जाता है।


शराबबंदी कानून: सामाजिक सुधार का प्रयास

बिहार सरकार ने अप्रैल 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। इसके बाद 2 अक्टूबर 2016 को नया मद्य निषेध कानून लागू किया गया।

सरकार का दावा है कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा के मामलों में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है और परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने इस निर्णय का व्यापक समर्थन किया था।


कानून व्यवस्था सुधार और स्पीडी ट्रायल

2005 के बाद बिहार में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्पीडी ट्रायल प्रणाली शुरू की गई। इसके तहत गंभीर अपराधों के मामलों की तेजी से सुनवाई की गई।

सरकार के अनुसार इस नीति से कई कुख्यात अपराधियों को सजा मिली और कानून व्यवस्था में सुधार हुआ। इससे राज्य की छवि और निवेश माहौल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने का दावा किया जाता है।


बाल विवाह और दहेज के खिलाफ अभियान

2017 में बिहार सरकार ने बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू किया। इस अभियान में लगभग ढाई करोड़ लोगों ने इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ शपथ ली।

इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला हेल्पलाइन शुरू की गई। राज्य के सभी 38 जिलों में हेल्पलाइन केंद्र स्थापित किए गए हैं।

ये केंद्र घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं को कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करते हैं।


शिक्षा और कौशल विकास योजनाएं

महिलाओं की साक्षरता बढ़ाने के लिए अक्षर अंचल योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 67 लाख से अधिक महिलाओं को साक्षर बनाया गया।

इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के लिए ‘हुनर’ और ‘औजार’ कार्यक्रम शुरू किए गए। इन कार्यक्रमों के जरिए उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और टूल किट दी जाती है, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें।


दो दशकों में सामाजिक बदलाव की कोशिश

पिछले करीब 20 वर्षों में बिहार में महिलाओं के सशक्तीकरण और सामाजिक सुधार के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। पंचायतों में आरक्षण से लेकर रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं तक कई कदम उठाए गए।

सरकार का दावा है कि इन योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने में मदद की। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इन नीतियों ने बिहार में सामाजिक बदलाव की चर्चा को नई दिशा दी है।


Source: सरकारी रिपोर्ट और सार्वजनिक नीति से संबंधित आधिकारिक आंकड़े

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