खाड़ी युद्ध का बड़ा झटका: तेल-गैस कीमतों में आग, सप्लाई संकट गहराया

 


खाड़ी युद्ध के कारण तेल-गैस कीमतों में उछाल ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। मार्च 2026 में कतर के रास लफान LNG प्लांट पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद तेल-गैस कीमतों में उछाल तेजी से बढ़ा। यह घटना मध्य-पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध के बीच हुई, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई। कतर, जो दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक है, वहां प्रोडक्शन ठप हो गया। इस संकट का असर भारत सहित कई आयातक देशों पर पड़ रहा है, जो ऊर्जा के लिए विदेशों पर निर्भर हैं।


रास लफान पर हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल

कतर के रास लफान LNG प्लांट पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार को हिला दिया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG प्लांट माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में गैस का निर्यात होता है।

हमले के बाद यहां उत्पादन पूरी तरह से बंद हो गया है। इससे वैश्विक बाजार में गैस की कमी का खतरा बढ़ गया है।

मार्च के पहले हफ्ते में भी ईरान ने कतर के गैस फील्ड्स को निशाना बनाया था, जिससे पहले ही सप्लाई पर असर पड़ा था।


सप्लाई चेन पर संकट, 700 से ज्यादा जहाज फंसे

खाड़ी युद्ध का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, अब युद्ध क्षेत्र में बदल गया है।

इस वजह से 700 से ज्यादा कार्गो जहाज सुरक्षित इलाकों में फंसे हुए हैं।

इससे तेल और गैस की सप्लाई में भारी देरी हो रही है, जिससे कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

ग्लोबल सप्लाई चेन लड़खड़ा गई है और कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा है।


भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?

भारत इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल और लगभग 50% नैचुरल गैस आयात करता है।

इसमें से करीब 20% LNG कतर से आता है।

ऐसी स्थिति में कतर में उत्पादन ठप होने का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है।

एनर्जी एक्सपर्ट किरीट पारीख के अनुसार, भारत को अब गैस की खपत कम करनी पड़ सकती है। खासकर पावर सेक्टर और इंडस्ट्री में इसका इस्तेमाल सीमित किया जा सकता है।


कीमतों में रिकॉर्ड तेजी, महंगाई बढ़ने का खतरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। पिछले एक महीने में इसमें करीब 57% की बढ़ोतरी हुई है।

वहीं, भारतीय बास्केट के अनुसार कच्चे तेल की कीमत 146.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो 2008 के रिकॉर्ड स्तर के करीब है।

इस तेजी से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ना तय है।


भारत ने क्या उठाए कदम?

सप्लाई बाधित होने के बाद भारत ने वैकल्पिक स्रोतों से LNG खरीदने के लिए नए ऑर्डर दिए हैं।

सरकारी गैस कंपनियां लगातार नए सप्लायर तलाश रही हैं ताकि संकट को कम किया जा सके।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल अस्थायी समाधान है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।


आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले और हालात का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।

  • पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है
  • बिजली दरों में बढ़ोतरी संभव
  • घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ सकती है
  • उद्योगों में लागत बढ़ने से वस्तुएं महंगी होंगी

इस संकट से लोगों को महंगाई का बड़ा झटका लग सकता है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित होगा।


आगे क्या?

मध्य-पूर्व में जारी तनाव अगर जल्द खत्म नहीं हुआ, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।

ऐसे में दुनिया के कई देशों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ना होगा।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स, पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC)

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