झारखंड शराब घोटाला: मरांडी का बड़ा फैसला, CBI जांच की मांग से सियासत गरम

 


रांची: झारखंड शराब घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। मंगलवार को रांची में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से मुलाकात कर झारखंड शराब घोटाला मामले में CBI जांच की मांग की। उन्होंने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब 750 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले पर सवाल उठ रहे हैं। मरांडी का आरोप है कि जांच एजेंसी ACB निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रही और चार्जशीट दाखिल करने में देरी हो रही है।


शराब घोटाला पर क्यों मचा सियासी बवाल?

झारखंड में शराब नीति को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष का दावा है कि वर्ष 2022 में उत्पाद नीति में बदलाव कर एक खास सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया गया।

इस बदलाव से राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ। शुरुआती जांच में मामला 38 करोड़ रुपये का बताया गया था, लेकिन अब यह बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक का बताया जा रहा है।

इसी वजह से विपक्ष इस मुद्दे को बड़ा आर्थिक घोटाला बता रहा है और सरकार को घेरने में जुटा है।


मरांडी ने ACB की भूमिका पर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

उनका कहना है कि ACB स्वतंत्र जांच करने के बजाय सत्ता से प्रभावित होकर काम कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एजेंसी आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

मरांडी ने कहा कि इतने बड़े मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होना खुद में कई संदेह पैदा करता है।


चार्जशीट में देरी से बढ़ी चिंता

नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में साफ लिखा कि जांच में देरी का सीधा फायदा आरोपियों को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं हुई, तो सबूत कमजोर हो सकते हैं और केस प्रभावित हो सकता है।

यह मुद्दा अब सिर्फ आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।


राज्यपाल से CBI जांच की मांग

मरांडी ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करें और मामले में हस्तक्षेप करें।

उन्होंने मांग की कि ACB को तुरंत चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए और पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की अनुशंसा की जाए।

उनका कहना है कि केवल CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी ही इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सकती है।


आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले से लोगों को यह उम्मीद है कि यदि जांच पारदर्शी तरीके से होती है तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

राज्य की राजस्व व्यवस्था पर पड़े असर की सच्चाई सामने आने से सरकार की जवाबदेही तय हो सकती है।

अगर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो जनता का भरोसा प्रशासन और कानून व्यवस्था पर कमजोर हो सकता है।


आगे क्या हो सकता है?

अब नजर राज्यपाल के फैसले पर टिकी है। यदि वे इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं, तो जांच की दिशा बदल सकती है।

CBI जांच की सिफारिश होती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति को और गर्म कर सकता है।

फिलहाल, यह मामला राज्य की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है और आने वाले समय में इसके और खुलासे हो सकते हैं।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स

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