
बिहार के खगड़िया में चिराग पासवान और पशुपति पारस मिलन की बड़ी खबर सामने आई है। 23 मार्च को खगड़िया के शहरबन्नी गांव में यह भावुक दृश्य देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान अपने दिवंगत चाचा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। यहां उन्होंने अपने चाचा पशुपति कुमार पारस के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और परिवार के साथ वर्षों की दूरियां मिटती नजर आईं। चिराग पासवान और पशुपति पारस मिलन की ये तस्वीरें अब तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे सियासी हलकों में भी हलचल बढ़ गई है।
बड़ी मां के गले लगकर रो पड़े चिराग
पैतृक आवास पहुंचते ही चिराग पासवान सबसे पहले अपनी बड़ी मां राजकुमारी देवी के पास पहुंचे।
जैसे ही उन्होंने उनके पैर छुए, बड़ी मां ने उन्हें गले से लगा लिया। यह पल बेहद भावुक था—चिराग की आंखों से आंसू छलक पड़े और वे काफी देर तक रोते रहे।
घर के आंगन में मौजूद हर शख्स इस दृश्य को देखकर भावुक हो गया। इस घटना ने दिखाया कि राजनीति से ऊपर परिवार और रिश्तों की अहमियत कितनी बड़ी होती है।
चाचा पारस के पैर छूते ही मिला ‘खुश रहो’ का आशीर्वाद
सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब चिराग पासवान और पशुपति पारस आमने-सामने आए।
सालों से चली आ रही राजनीतिक खटास के बावजूद चिराग ने झुककर अपने चाचा के पैर छुए। जवाब में पारस ने उन्हें “खुश रहो” कहकर आशीर्वाद दिया।
दोनों नेताओं के बीच करीब 5 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत भी हुई। हालांकि बातचीत की डिटेल सामने नहीं आई, लेकिन चेहरे के भाव साफ संकेत दे रहे थे कि रिश्तों की बर्फ पिघल चुकी है।
भाई प्रिंस राज से गले मिलकर खत्म हुए गिले-शिकवे
परिवार की एकजुटता यहीं नहीं रुकी।
चिराग पासवान ने अपने छोटे भाई प्रिंस राज से भी मुलाकात की। दोनों भाई एक-दूसरे के गले लगे और लंबे समय तक साथ नजर आए।
इस दौरान वहां मौजूद समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की, जिससे माहौल और भी भावुक और उत्साहित हो गया।
क्या फिर एक होगा पासवान परिवार?
इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस तरह से चिराग पासवान ने अपने बड़ों का सम्मान किया और भाइयों से दूरी खत्म की, उससे यह संकेत मिल रहे हैं कि दिवंगत नेता रामविलास पासवान का परिवार फिर से एकजुट हो सकता है।
हालांकि अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस मुलाकात ने सियासी समीकरणों को जरूर बदलने के संकेत दे दिए हैं।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
इस घटनाक्रम का असर सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रहेगा।
अगर पासवान परिवार एकजुट होता है, तो बिहार की राजनीति में नई ताकत उभर सकती है। इससे चुनावी रणनीतियों और गठबंधन समीकरणों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
इस फैसले से लोगों को यह संदेश मिला है कि राजनीतिक मतभेद के बावजूद रिश्तों को जोड़ा जा सकता है, जो समाज के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें
शहरबन्नी की यह भावुक मुलाकात अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
लोग इसे “रिश्तों की जीत” और “राजनीति से ऊपर परिवार” जैसे संदेशों के साथ शेयर कर रहे हैं।
इन तस्वीरों ने आम जनता के दिल को छू लिया है और यही वजह है कि यह खबर तेजी से ट्रेंड कर रही है।
Source: स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स