चैती छठ 2026: आज खरना का बड़ा अपडेट, 36 घंटे निर्जला व्रत शुरू

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चैती छठ 2026 का दूसरा दिन आज पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में लाखों व्रती आज खरना पूजा करेंगे। आज (तारीख), शाम के समय व्रती प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करेंगे। खास बात यह है कि इस बार कृत्तिका नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो इस पर्व को और भी शुभ बना रहा है। चैती छठ 2026 के इस अहम दिन पर व्रती पूरे दिन निराहार रहकर शाम को पूजा संपन्न करते हैं।


खरना पूजा का शुभ मुहूर्त और समय

खरना पूजा छठ पर्व का बेहद महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस दिन व्रती दिनभर बिना अन्न-जल के उपवास रखते हैं और संध्या समय पूजा करते हैं।

  • खरना पूजा मुहूर्त: शाम 6:01 बजे से 7:29 बजे तक
  • अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य: शाम 6:02 बजे तक
  • उदीयमान सूर्य को अर्घ्य (अगले दिन): सुबह 5:57 बजे के बाद

इस समय के भीतर पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सही मुहूर्त में की गई पूजा से व्रत का पूरा फल मिलता है।


खरना प्रसाद में क्या बनता है खास

खरना के दिन बनने वाला प्रसाद शुद्धता और सादगी का प्रतीक होता है। इसमें लहसुन-प्याज का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता।

खरना प्रसाद में शामिल होते हैं:

  • दूध और गुड़ से बनी खीर
  • गेहूं के आटे की रोटी
  • मौसमी फल

व्रती पहले इस प्रसाद को भगवान को अर्पित करते हैं, फिर स्वयं ग्रहण करते हैं। इसके बाद ही 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू होता है।


36 घंटे का निर्जला व्रत: कितना कठिन और क्यों खास

खरना के बाद शुरू होने वाला 36 घंटे का निर्जला व्रत छठ पर्व का सबसे कठिन हिस्सा माना जाता है। इस दौरान व्रती न तो पानी पीते हैं और न ही अन्न ग्रहण करते हैं।

यह व्रत पूरी श्रद्धा, अनुशासन और संयम का प्रतीक है।

  • शरीर और मन दोनों की परीक्षा होती है
  • व्रती पूरी तरह पूजा और साधना में लीन रहते हैं

इस फैसले से लोगों को अपनी आस्था और आत्मबल को परखने का मौका मिलता है, जो छठ पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है।


छठ पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

छठ पर्व सूर्य देवता और छठी मईया को समर्पित है। यह भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ नेपाल में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • छठ व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है
  • परिवार में सुख-समृद्धि आती है
  • स्वास्थ्य बेहतर होता है

यह पर्व प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी प्रतीक है।


लोगों की जिंदगी पर असर और भावनात्मक जुड़ाव

छठ पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव का भी माध्यम है। घर-परिवार से दूर रहने वाले लोग भी इस अवसर पर अपने गांव लौटते हैं।

इस पर्व से लोगों को:

  • परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलता है
  • सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है
  • आस्था और विश्वास को नई ऊर्जा मिलती है

यही कारण है कि छठ को “लोक आस्था का महापर्व” कहा जाता है।


आगे क्या होगा: तीसरे और चौथे दिन की झलक

खरना के बाद तीसरे दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होगा।

इन दोनों दिनों का विशेष महत्व होता है और घाटों पर भव्य दृश्य देखने को मिलता है।


Source: धार्मिक पंचांग एवं स्थानीय परंपराएं

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