जनगणना 2027 में डेटा पूरी तरह गोपनीय, RTI से भी नहीं मिलेगी जानकारी

 


नई दिल्ली | क्या, कब, कहां, कौन, क्यों और कैसे?
भारत में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने 30 मार्च 2026 को जानकारी दी कि जनगणना 2027 के दौरान जुटाया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। जनगणना 2027 के तहत यह डेटा न तो RTI के जरिए साझा होगा, न अदालत में साक्ष्य बनेगा और न किसी अन्य संस्था को दिया जाएगा। यह फैसला जनगणना प्रक्रिया को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए लिया गया है।

डेटा गोपनीयता पर सरकार का बड़ा फैसला

रजिस्ट्रार जनरल ने स्पष्ट किया कि जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 15 के तहत व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह संरक्षित रहेगी।

इसका मतलब है कि किसी भी नागरिक का डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

यहां तक कि सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत भी इसे साझा नहीं किया जा सकता।

सरकार का कहना है कि इससे नागरिकों की निजता सुरक्षित रहेगी और लोग बिना डर के सही जानकारी दे सकेंगे।

दो चरणों में होगी जनगणना प्रक्रिया

जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी:

पहला चरण: हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना
इसमें घरों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, जैसे मकान की स्थिति, सुविधाएं और परिवार की संरचना।

दूसरा चरण: जनसंख्या गणना
इसमें व्यक्तिगत जानकारी जैसे आयु, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय, जाति और अन्य सामाजिक-आर्थिक डेटा शामिल होगा।

यह पूरा अभियान चरणबद्ध तरीके से अप्रैल 2026 से शुरू होकर 2027 तक चलेगा।

पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना

इस बार जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल सिस्टम का उपयोग है।

नागरिक अब खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, जिसे ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ कहा जाता है।

यह सुविधा 15 दिनों के लिए उपलब्ध होगी और इससे गणनाकर्मियों पर निर्भरता कम होगी।

डिजिटल सिस्टम से डेटा संग्रह तेज, सटीक और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

संदर्भ तिथि क्यों है अहम?

जनगणना 2027 के लिए 1 मार्च 2027 को संदर्भ तिथि तय की गई है।

हालांकि, बर्फीले क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 होगी।

यह तिथि एक “स्नैपशॉट” की तरह काम करती है, जिससे पूरे देश का एक समान और विश्वसनीय डेटा तैयार किया जा सके।

इससे आंकड़ों की सटीकता और तुलना में आसानी होती है।

80 हजार से ज्यादा कर्मियों को प्रशिक्षण

जनगणना को सफल बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है।

देशभर में 80 हजार से अधिक प्रशिक्षण बैच बनाए गए हैं, जिनमें गणनाकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

करीब 30 लाख कर्मचारी और अधिकारी इस अभियान में शामिल होंगे।

ये सभी मोबाइल एप के जरिए घर-घर जाकर डेटा संग्रह करेंगे।

डेटा सुरक्षा के लिए सख्त इंतजाम

सरकार ने डेटा सुरक्षा को लेकर भी विशेष प्रबंध किए हैं।

डेटा केंद्रों को “महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना” का दर्जा दिया गया है।

पूरी प्रक्रिया में एंड-टू-एंड सुरक्षा सिस्टम लागू किया जाएगा।

इससे डेटा लीक या दुरुपयोग की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।

नियम तोड़ने पर सख्त सजा

जनगणना के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही या डेटा के दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई होगी।

जनगणना अधिनियम 1948 के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और तीन साल तक की सजा हो सकती है।

इसके अलावा, नागरिकों से आपत्तिजनक सवाल पूछना भी अपराध माना जाएगा।

अधिकारियों को पहले ही सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

इस बार क्या है नया बदलाव?

जनगणना 2027 में कुछ नए बदलाव भी देखने को मिलेंगे:

  • लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को शादीशुदा माना जा सकता है
  • घर के मुखिया का जेंडर (पुरुष/महिला/ट्रांसजेंडर) दर्ज होगा
  • हाउस लिस्टिंग में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे
  • बेघर लोगों को भी शामिल किया जाएगा

ये बदलाव समाज के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

निष्कर्ष

जनगणना 2027 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया होगी, जिसमें डिजिटल तकनीक और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

सरकार का जोर पारदर्शिता के साथ-साथ नागरिकों की गोपनीयता बनाए रखने पर है।

इस बार की जनगणना न केवल आधुनिक तकनीक से लैस होगी, बल्कि सामाजिक बदलावों को भी बेहतर तरीके से दर्शाएगी।


Source: रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस एवं सरकारी जानकारी

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