अहम खबर: CO हड़ताल पर सख्ती, अब सस्पेंशन नहीं FIR भी

 


पटना: बिहार CO हड़ताल को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। क्या, कब, कहां, कौन, क्यों और कैसे—इन सभी पहलुओं को देखें तो राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार CO हड़ताल के दौरान काम पर लौटे अधिकारियों को धमकाने वालों पर अब सिर्फ सस्पेंशन नहीं, बल्कि FIR भी दर्ज होगी। यह फैसला हाल में सामने आई व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए धमकी देने की शिकायतों के बाद लिया गया है।

सरकार का कड़ा रुख, FIR तक पहुंचेगा मामला

राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने चेतावनी दी है कि काम कर रहे अधिकारियों को डराने-धमकाने वाले लोगों को चिन्हित कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य भी है।

व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर निगरानी तेज

विभाग को मिली शिकायतों के अनुसार, कुछ हड़ताली अधिकारी अपने सहयोगियों को व्हाट्सएप कॉल और सोशल मीडिया के जरिए धमका रहे हैं।

इसके साथ ही ‘नेमिंग एंड शेमिंग’ जैसे तरीकों से मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

सरकार ने इसे सरकारी कार्य में बाधा डालने की साजिश माना है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इन धाराओं में होगी कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।

इनमें प्रमुख धाराएं शामिल हैं:

  • धारा 132, 351, 352
  • धारा 126, 127, 349
  • धारा 350, 195
  • आईटी एक्ट 2000 की धारा 67

इन धाराओं के तहत आरोपियों को जेल तक भेजा जा सकता है।

अधिकारियों को सुरक्षा और सम्मान का भरोसा

सरकार ने काम पर लौटे अधिकारियों को सुरक्षा और सम्मान देने का भरोसा भी दिया है।

विजय सिन्हा ने कहा कि ईमानदारी से काम कर रहे अधिकारियों को डराने की कोशिश कायरता है और इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकार ने यह भी कहा कि दोषियों को चिन्हित कर कड़ी सजा दी जाएगी।

बढ़ा दबाव, लौटने लगे अधिकारी

सरकारी सख्ती के बाद हड़ताली अधिकारियों के बीच दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक 24 अधिकारी काम पर लौट चुके हैं।

पहले ही गैर-हड़ताली अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर कामकाज जारी रखने के निर्देश दिए गए थे।

जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश

राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में तुरंत FIR दर्ज की जाए।

साथ ही की गई कार्रवाई की रिपोर्ट विभाग को भेजने के लिए भी कहा गया है।

यह कदम सुनिश्चित करेगा कि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो।

आंदोलन के नेतृत्व पर भी नजर

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि जो अधिकारी इस्तीफा देकर चुनाव लड़ रहे हैं और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके कार्यों की भी जांच की जाएगी।

इससे साफ है कि सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

क्या है आगे की स्थिति?

फिलहाल सरकार और हड़ताली अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।

हालांकि सख्ती के बाद कई अधिकारी काम पर लौट रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हड़ताल पूरी तरह खत्म होती है या फिर विवाद और बढ़ता है।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रशासनिक अनुशासन और कानून व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है।

सरकार का मानना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई, तो इससे सरकारी कामकाज प्रभावित हो सकता है।

इसलिए यह कदम एक सख्त संदेश देने के लिए उठाया गया है कि नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा।


Source: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार

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