बिहार में बिहार भूमि राजस्व कार्यों को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। सोमवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया कि बिहार भूमि राजस्व कार्यों जैसे लगान वसूली, दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और ई-मापी में किसी भी तरह की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पटना में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रधान सचिव सीके अनिल ने राज्य के 537 अंचलाधिकारियों के साथ इन मामलों की समीक्षा की। बैठक में तय किया गया कि सभी राजस्व कार्यों का निपटारा तय समय सीमा में किया जाए। सरकार का कहना है कि यह कदम जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने और आम लोगों की शिकायतों का जल्द समाधान करने के लिए उठाया गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि जमीन से जुड़े मामलों में देरी से आम नागरिकों को परेशानी होती है, इसलिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।
राजस्व कार्यों में ढिलाई पर होगी कार्रवाई
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ किया है कि दाखिल-खारिज, लगान वसूली, परिमार्जन और ई-मापी जैसे कार्यों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्र में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और तय समय के भीतर उनका निपटारा सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
537 अंचलाधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक
पटना में आयोजित बैठक में राज्य के 537 अंचलाधिकारियों के साथ राजस्व कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
इस दौरान भू-लगान वसूली, दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और ई-मापी के मामलों की स्थिति पर चर्चा हुई।
बैठक में यह भी देखा गया कि कई जिलों में इन कार्यों का निष्पादन समय पर हो रहा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अब भी लंबित मामलों की संख्या अधिक है।
सरकार ने ऐसे क्षेत्रों में काम की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं।
बेहतर काम करने वाले अधिकारियों की हुई सराहना
बैठक के दौरान उन अंचलाधिकारियों की भी सराहना की गई जिन्होंने लगान वसूली और अन्य राजस्व कार्यों में बेहतर प्रदर्शन किया है।
प्रधान सचिव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि काम के बेहतर परिणाम को प्रोत्साहित करना भी है।
इसी वजह से जिन अधिकारियों ने लक्ष्य के अनुसार काम किया है, उनकी सराहना की गई ताकि अन्य अधिकारी भी प्रेरित हो सकें।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू होगी डिजिटल डायरी
राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार डिजिटल डायरी प्रणाली लागू करने जा रही है।
यह डायरी राजस्व कर्मचारियों और अमीनों दोनों के लिए होगी। इसमें हर दिन किए गए कार्यों का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा।
इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों की दैनिक गतिविधियों की निगरानी हो सके और काम में पारदर्शिता बनी रहे।
अंचलाधिकारी करेंगे रोजाना निगरानी
नई व्यवस्था के तहत अंचलाधिकारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है।
उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना कर्मचारियों और अमीनों की डिजिटल डायरी का अवलोकन करें।
इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जमीन से जुड़े मामलों पर नियमित रूप से काम हो रहा है और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।
जनशिकायत पोर्टल की शिकायतों का होगा त्वरित समाधान
बैठक में सचिव गोपाल मीणा ने जनशिकायत पोर्टल से जुड़ी शिकायतों पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों की शिकायतों का समाधान समय सीमा के भीतर करना बेहद जरूरी है।
इसलिए सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का जल्द और प्रभावी निपटारा करें।
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने दी सख्त चेतावनी
उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कहा है कि राजस्व कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भू-लगान वसूली, दाखिल-खारिज और ई-मापी जैसे कार्य सीधे आम नागरिकों से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में देरी होने से लोगों को अनावश्यक परेशानी होती है।
इसलिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सभी मामलों का समाधान पारदर्शी तरीके से और तय समय के भीतर किया जाए।
आम लोगों को मिल सकती है बड़ी राहत
सरकार के इस फैसले से जमीन से जुड़े मामलों में आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अक्सर दाखिल-खारिज, जमीन मापी या परिमार्जन जैसे कार्यों में लंबा समय लग जाता है। इससे लोगों को कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
नई निगरानी व्यवस्था और सख्त निर्देशों से उम्मीद है कि इन प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और लोगों को समय पर सेवा मिल सकेगी।
Source: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग / मीडिया रिपोर्ट