पटना/नई दिल्ली: द केरला स्टोरी 2 को लेकर बिहार में सियासी विवाद तेज हो गया है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने बुधवार को द केरला स्टोरी 2 पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। यह विवाद फिल्म के संभावित निर्माण और उसके राजनीतिक संदर्भों को लेकर खड़ा हुआ है। पप्पू यादव ने कहा कि फिल्मों का राजनीतिकरण हो रहा है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका सवाल है—क्या अब यह तय होगा कि कौन सी फिल्म बने और कौन सी नहीं?
उन्होंने कहा कि सिनेमा समाज का दर्पण होता है, उसे राजनीतिक एजेंडा का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
फिल्म The Kerala Story के पहले भाग को लेकर देशभर में पहले ही बहस हो चुकी है। अब इसके संभावित दूसरे भाग ‘द केरला स्टोरी 2’ को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
इसी मुद्दे पर पप्पू यादव ने कहा कि फिल्मों के जरिए समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सिनेमा के जरिए अपनी राजनीतिक सोच को आगे बढ़ाना चाहती है।
उनका बयान ऐसे समय आया है जब देश में फिल्म और राजनीति के रिश्ते पर लगातार बहस चल रही है।
पप्पू यादव का तीखा सवाल
पप्पू यादव ने कहा,
“पहले द केरला स्टोरी, अब द केरला स्टोरी 2। क्या सभी स्वतंत्र संस्थाओं पर भाजपा की मार्केटिंग का कब्जा है? क्या भाजपा तय करेगी कि भारत का दर्शन और दर्पण क्या होगा? क्या भाजपा तय करेगी कि कौन सी फिल्म बनाई जाए?”
उन्होंने केरल को सर्वसमाज वाला राज्य बताते हुए कहा कि वहां नफरत की राजनीति नहीं चल सकती।
उनका दावा है कि सिनेमा को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
फ्रीबीज पर भी लगाया आरोप
फिल्म विवाद के बाद पप्पू यादव ने मुफ्त योजनाओं (फ्रीबीज) पर भी केंद्र सरकार को घेरा।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि इसके पीछे कोई गहरी रणनीति हो सकती है। उनका आरोप है कि जब वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, तो सरकार वेलफेयर योजनाओं को सीमित करने का रास्ता तलाश रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों को मिलने वाले लाभ पर खतरा मंडरा सकता है।
5 किलो अनाज योजना पर क्या बोले?
पप्पू यादव ने केंद्र की मुफ्त अनाज योजना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 83 करोड़ लोगों को 5 किलो अनाज देने को राजनीतिक रूप से भुनाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब गरीबों की जीविका पर “गिद्ध दृष्टि” है।
हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सियासी असर क्या हो सकता है?
द केरला स्टोरी 2 को लेकर उठा यह विवाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिल्म और राजनीति का मेल चुनावी माहौल में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
इस फैसले से लोगों को यह सवाल जरूर सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा कि क्या सिनेमा पूरी तरह स्वतंत्र रह पाएगा या उस पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा।
आम जनता पर असर
सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद का माध्यम भी है।
अगर फिल्मों पर राजनीतिक प्रभाव की धारणा मजबूत होती है, तो इसका असर दर्शकों के भरोसे पर पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है—क्या रचनात्मक अभिव्यक्ति को राजनीतिक चश्मे से देखा जाना चाहिए?
आगे क्या?
फिलहाल ‘द केरला स्टोरी 2’ को लेकर आधिकारिक घोषणा या विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
लेकिन बयानबाजी से स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाएगा।
बिहार की राजनीति में यह विवाद नई रणनीतियों और बयानबाजी को जन्म दे सकता है।
Source: आईएएनएस
