बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में शुरू हुई राजद और जदयू की जुबानी जंग अब सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। दोनों दलों ने अपने आधिकारिक हैंडल से एक-दूसरे पर तीखे और व्यक्तिगत टिप्पणी वाले पोस्ट किए। सदन में हुई नोकझोंक के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
सदन की बहस से सोशल मीडिया तक पहुंची तकरार
पटना में चल रहे बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान राजद (RJD) और जदयू (JDU) के बीच शुरू हुई तीखी बहस अब सोशल मीडिया पर भी खुलकर सामने आ गई है।
विधान परिषद में हुई नोकझोंक के बाद दोनों पार्टियों ने अपने-अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से एक-दूसरे पर कड़े शब्दों में हमला बोला। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच भाषा की मर्यादा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
RJD का पोस्ट और राजनीतिक संदेश
राजद ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें “जिंदा लाश” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। पोस्ट में हैशटैग के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधने की कोशिश मानी जा रही है।
इस पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई और समर्थकों के बीच भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
JDU का पलटवार
राजद के पोस्ट के जवाब में जदयू ने भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। अपने आधिकारिक अकाउंट से किए गए पोस्ट में जदयू ने विकास कार्यों का जिक्र करते हुए राजद नेतृत्व पर हमला बोला।
पोस्ट में व्यक्तिगत टिप्पणियों और हैशटैग का इस्तेमाल किया गया, जिसे राजनीतिक जवाबी हमला माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर दोनों दलों के समर्थकों के बीच बहस और तेज हो गई।
विधान परिषद में भी रही गर्मागर्मी
मंगलवार को विधान परिषद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इसके अलावा मंत्री अशोक चौधरी और राजद के एमएलसी सुनील सिंह के बीच भी बहस हुई।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सभापति को विपक्षी सदस्यों को दिनभर के लिए मार्शल आउट करने का निर्देश देना पड़ा।
कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष का हमला
राजद इन दिनों राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेर रहा है। विपक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस्तीफे की मांग कर रहा है।
वहीं जदयू नेताओं का कहना है कि विपक्ष पहले बयानबाजी शुरू करता है और पार्टी केवल उसका जवाब देती है।
राजनीतिक माहौल गरम
बजट सत्र के दौरान शुरू हुई यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल के मद्देनजर बयानबाजी का स्तर और आक्रामक हो सकता है।
हालांकि, कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर संयमित भाषा के इस्तेमाल की अपील की है।


