
जम्मू-कश्मीर पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बना है। शनिवार को फाइनल मुकाबले में कर्नाटक के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए जम्मू-कश्मीर ने 67 साल का इंतजार खत्म किया। इस रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनने की उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र को जश्न में डुबो दिया। युधवीर सिंह के निर्णायक विकेट ने जीत पक्की की, जबकि औकिब नबी के शानदार प्रदर्शन ने मैच की दिशा तय की। यह जीत वर्षों की मेहनत, संघर्ष और विश्वास का परिणाम है।
जैसे ही कर्नाटक की पहली पारी का आखिरी विकेट गिरा, खिलाड़ियों और समर्थकों की खुशी देखने लायक थी। यह सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए पहचान का नया अध्याय है।
67 साल का इंतजार हुआ खत्म
जम्मू-कश्मीर 1957 से घरेलू क्रिकेट खेल रहा है। लेकिन इतने लंबे समय में टीम कभी भी राष्ट्रीय चैंपियन नहीं बन सकी थी।
इस बार टीम ने न केवल फाइनल में जगह बनाई, बल्कि दबाव में शानदार खेल दिखाते हुए खिताब भी अपने नाम किया।
राज्य में प्रथम श्रेणी स्तर के सिर्फ दो मैदान हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद टीम का यह प्रदर्शन बेहद खास माना जा रहा है।
औकिब नबी का चमका सितारा
इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े नायक औकिब नबी रहे। क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में उन्होंने कुल 26 विकेट लेकर विपक्षी टीमों को बैकफुट पर धकेल दिया।
उनकी एकाग्रता और शांत स्वभाव टीम के लिए मजबूती बना। वह कम बोलते हैं, लेकिन मैदान पर जवाब देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि औकिब जल्द ही भारतीय टीम के दरवाजे तक पहुंच सकते हैं।
कप्तान और कोच की अहम भूमिका
कप्तान परस डोगरा ने टीम को संतुलन दिया। मुख्य कोच अजय शर्मा की रणनीति भी सटीक रही।
कामरान इकबाल, शुभम पुंडीर, सुनील कुमार और अब्दुल समद जैसे खिलाड़ियों ने निर्णायक मौकों पर योगदान दिया।
यह जीत किसी एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।