नई दिल्ली/राज्य ब्यूरो। चुनाव आयोग ने चुनाव से जुड़े निर्देशों की अनदेखी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में आयोग ने साफ कहा है कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद पहले जारी किए गए सख्त निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
आयोग के मुताबिक जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत
- दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO)
- दो सहायक ERO (AERO)
- एक डेटा एंट्री ऑपरेटर
के खिलाफ अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, जबकि ऐसा किया जाना अनिवार्य था।
आयोग ने इस संबंध में 5 अगस्त 2025 और 2 जनवरी 2026 को भेजे गए अपने पत्रों का भी हवाला दिया है।
11 अतिरिक्त AERO की अनधिकृत तैनाती का आरोप
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बशीरहाट-2 की AERO एवं प्रखंड विकास अधिकारी सुमित्रा प्रतिम प्रधान को अब तक निलंबित नहीं किया गया है।
उन पर आरोप है कि उन्होंने वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अपनी मर्जी से 11 अतिरिक्त AERO की अनधिकृत तैनाती की।
48 घंटे में अनुपालन का निर्देश
आयोग ने बताया कि 25 जनवरी 2026 को भेजे गए पत्र में 48 घंटे के भीतर अनुपालन करने को कहा गया था।
यह मामला—
- 21 सितंबर 2000 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश
- और 31 मई 2023 को जारी चुनाव आयोग के निर्देशों
का सीधा उल्लंघन माना गया है।
मतदाता सूची पर्यवेक्षकों के तबादले भी रद्द नहीं
इसके अलावा आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर
27 अक्टूबर 2025 को जारी निर्देशों का उल्लंघन होने के बावजूद
तीन मतदाता सूची पर्यवेक्षकों—
- अश्विनी कुमार यादव
- रणधीर कुमार
- स्मिता पांडे
के तबादले अब तक रद्द नहीं किए गए हैं।
इस संबंध में आयोग ने 27 जनवरी 2026 को पत्र भेजकर 28 जनवरी को अपराह्न 3 बजे तक निर्देशों के पालन को कहा था।
नियुक्तियों के मानकों पर भी सवाल
चुनाव आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और अन्य चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी चिंता जताई है। आयोग का कहना है कि कई नियुक्तियां उसके तय मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं, जो चुनावी निष्पक्षता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
