बिहार में मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना के तहत कुसुमवती कन्या मध्य विद्यालय, दलसिंहसराय के छात्र-छात्राएं बुधवार सुबह पटना के लिए रवाना हुए। यह शैक्षणिक यात्रा 2025-26 सत्र के अंतर्गत आयोजित की गई। बच्चों को प्रधानाध्यापक रामानुराग झा के नेतृत्व में बस से पटना भेजा गया। इस मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देना और कक्षा से बाहर सीखने का अवसर प्रदान करना है।
विद्यालय शिक्षा समिति की सचिव कंचन देवी ने हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया। इस दौरान शिक्षक राहुल कुमार, शिक्षिका सोनी कुमारी और रसोईया मनोज कुमार ठाकुर बच्चों के साथ मौजूद रहे।
इस फैसले से लोगों को उम्मीद है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी बड़े शहरों के शैक्षणिक संसाधनों का लाभ मिलेगा।
पटना में कहां-कहां करेंगे भ्रमण?
प्रधानाध्यापक रामानुराग झा ने बताया कि छात्र-छात्राएं पटना में स्थित श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र और साइंस सिटी पटना का भ्रमण करेंगे।
इन केंद्रों पर विज्ञान से जुड़े मॉडल, प्रयोग और प्रदर्शनी बच्चों को नई जानकारी देंगे।
इसके अलावा अन्य ज्ञानवर्धन स्थलों का भी दौरा कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो सके।
क्या है मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना?
मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण के जरिए व्यावहारिक अनुभव देना है।
इस योजना के तहत छात्र-छात्राओं को ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण कराया जाता है।
ग्रामीण और छोटे कस्बों के बच्चों के लिए यह पहल खास मायने रखती है, क्योंकि उन्हें बड़े शहरों के शैक्षणिक संसाधनों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि कक्षा में पढ़ाई के साथ फील्ड विजिट बच्चों की समझ को और मजबूत बनाती है।
अभिभावकों में दिखा उत्साह
बस रवाना होने के समय कई अभिभावक और समिति सदस्य मौजूद रहे।
समिति की सदस्य मीरा देवी और चांदनी देवी ने बच्चों को शुभकामनाएं दीं।
अभिभावकों ने कहा कि इस तरह की पहल से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे नए सपने देखने लगते हैं।
यह पहल खासकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।
शिक्षा को मिलेगा व्यावहारिक आयाम
शैक्षणिक विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञान केंद्र और संग्रहालय जैसे स्थानों का भ्रमण छात्रों के लिए जीवंत कक्षा जैसा अनुभव देता है।
जब बच्चे खुद मॉडल देखते हैं, प्रयोग समझते हैं और सवाल पूछते हैं, तो उनकी जिज्ञासा बढ़ती है।
इस फैसले से लोगों को लगता है कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सकारात्मक बदलाव आएगा।
ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राएं जब राजधानी के संस्थानों को देखते हैं, तो उनके भीतर आगे बढ़ने की नई ऊर्जा पैदा होती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
- बच्चों को किताबों से आगे सीखने का मौका
- विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि में वृद्धि
- आत्मविश्वास और सामाजिक समझ का विकास
- बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन
इस तरह की योजनाएं न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देती हैं।
आगे क्या?
विद्यालय प्रशासन ने बताया कि भ्रमण के बाद बच्चों से अनुभव साझा कराया जाएगा।
संभव है कि भविष्य में और भी स्कूलों को इस योजना से जोड़ा जाए।
यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो अन्य जिलों में भी इसका विस्तार किया जा सकता है।
ग्रामीण इलाके के छात्रों के लिए यह यात्रा सिर्फ एक पिकनिक नहीं, बल्कि सपनों की नई उड़ान है।
जब बच्चे बड़े संस्थानों को नजदीक से देखते हैं, तो उनके भीतर भी बड़े लक्ष्य बनाने की प्रेरणा जन्म लेती है।
Source: विद्यालय प्रशासन व स्थानीय शिक्षा समिति की जानकारी
