बिहार में शिव सर्किट पर बड़ा फैसला, इन मंदिरों को जोड़ बनेगा शिवलोक

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें

 


बिहार में बिहार शिव सर्किट को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। क्या—राज्य के प्रमुख शिव मंदिरों को एक धार्मिक पर्यटन मार्ग से जोड़ने की योजना, कब—हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान घोषणा, कहां—पूरे बिहार में, कौन—पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल, क्यों—धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, और कैसे—बेहतर सड़क संपर्क व सुविधाओं के विकास के जरिए। बिहार शिव सर्किट योजना के तहत मंदिरों को जोड़कर एक संगठित आस्था गलियारा तैयार किया जाएगा, जिसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

इस फैसले से लोगों को न सिर्फ आसान यात्रा का लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।


काशी-अयोध्या की तर्ज पर बनेगा आस्था मार्ग

राज्य सरकार पहले ही Buddha Circuit और Ramayana Circuit को बढ़ावा दे चुकी है। अब इन्हीं की तर्ज पर ‘शिव सर्किट’ विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

योजना के तहत पौराणिक और प्रसिद्ध शिव मंदिरों को बेहतर सड़क, संकेतक, पार्किंग और मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।

सरकार का लक्ष्य है कि सावन और अन्य पर्वों के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा अनुभव मिल सके।


किन-किन मंदिरों को मिल सकता है स्थान?

विधानसभा में चर्चा के दौरान कई प्रमुख शिव धामों के नाम सामने आए। इनमें शामिल हैं:

  • बाबा गरीबनाथ मंदिर
  • अजगैबीनाथ मंदिर
  • उगना महादेव मंदिर
  • हरिहरनाथ मंदिर
  • बैजूधाम
  • सोमेश्वरनाथ मंदिर
  • अशोक धाम
  • सिंघेश्वर महादेव मंदिर

इन मंदिरों को बेहतर सड़क नेटवर्क और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का प्रस्ताव है।

हालांकि अंतिम सूची विधायकों से प्राप्त सुझावों और विस्तृत सर्वे के बाद तय होगी।


विधायकों से मांगी जाएगी मंदिरों की सूची

सरकार ने योजना को समावेशी बनाने के लिए सभी विधायकों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के प्रमुख शिव मंदिरों की जानकारी उपलब्ध कराएं।

विशेष रूप से उन मंदिरों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां सावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।

प्राप्त सुझावों के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी, ताकि बजट और सहयोग सुनिश्चित किया जा सके।


कांवर यात्रा मार्गों पर भी फोकस

चर्चा के दौरान कांवर यात्रा मार्गों को बेहतर बनाने की मांग भी उठी। नए कांवर पथ विकसित करने और पुराने मार्गों की मरम्मत का सुझाव दिया गया।

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कांवरियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा।

इससे सड़क दुर्घटनाओं और भीड़ प्रबंधन की समस्याओं में भी कमी आ सकती है।


धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई गति

पर्यटन विभाग का मानना है कि ‘शिव सर्किट’ बनने से बिहार में सालभर धार्मिक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी।

इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा।

छोटे शहरों और कस्बों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।


आम लोगों पर क्या होगा असर?

बिहार के लाखों शिवभक्तों के लिए यह एक भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों तरह की राहत है।

अब उन्हें लंबी और कठिन यात्राओं की जगह बेहतर सड़कों और सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।

इस फैसले से लोगों को संगठित, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

साथ ही, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय युवाओं को भी फायदा हो सकता है।


आगे क्या?

अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्ताव को केंद्र से मंजूरी और बजट कब मिलता है।

यदि परियोजना को समय पर स्वीकृति मिलती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से उभर सकता है।

‘शिव सर्किट’ न केवल आस्था का मार्ग बनेगा, बल्कि विकास और रोजगार का भी नया रास्ता खोल सकता है।


Source: बिहार विधानसभा में पथ निर्माण विभाग की आधिकारिक जानकारी

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1