Bihar News: नगर निगमों में अब ‘नॉमिनेशन राज’ खत्म, गुप्त मतदान से चुनी जाएगी सशक्त स्थायी समिति



पटना: बिहार सरकार ने शहरी निकायों में बड़ा और निर्णायक बदलाव करते हुए महापौरों और मुख्य पार्षदों की एकछत्र शक्तियों पर लगाम लगाने का फैसला किया है। अब नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चयन किसी एक चेहरे की पसंद से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक गुप्त मतदान के जरिए होगा।

सरकार के इस फैसले को शहरी प्रशासन में मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। चालू बजट सत्र में संशोधन विधेयक के कानून बनते ही बिहार के सभी शहरी निकायों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

नॉमिनेशन सिस्टम खत्म, चुनाव से होगा चयन

अब तक सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों को महापौर या मुख्य पार्षद द्वारा नामित किया जाता था। इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से पक्षपात, मनमानी और गुटबाजी के आरोप लगते रहे हैं।

संशोधन विधेयक के तहत:

  • नामांकन की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त की जाएगी
  • समिति के सदस्य बहुमत के आधार पर चुने जाएंगे
  • चुनाव प्रक्रिया गुप्त मतदान से होगी
  • पूरी प्रक्रिया जिला पदाधिकारी (DM) के पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में संपन्न होगी

नगर विकास एवं आवास विभाग समय-समय पर मतदान से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा।

एक व्यक्ति नहीं, सामूहिक निर्णय होंगे

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से निर्णय लेने की शक्ति किसी एक व्यक्ति के हाथ में सीमित नहीं रहेगी। चुनाव के जरिए:

  • अलग-अलग वार्डों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा
  • विकास योजनाओं के चयन में संतुलन आएगा
  • फंड के वितरण को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी
  • नगर निकायों के भीतर चलने वाली खींचतान और टकराव कम होंगे

DM की निगरानी, पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया

नई नियमावली के तहत चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। गुप्त मतदान के कारण पार्षद किसी दबाव में आए बिना स्वतंत्र रूप से वोट कर सकेंगे। जिला पदाधिकारी की सीधी निगरानी से प्रशासनिक निष्पक्षता भी सुनिश्चित की जाएगी।

जिलास्तरीय बैठकों में सांसद-विधायकों की एंट्री

कैबिनेट ने एक और अहम फैसला लेते हुए जिलास्तरीय विकास बैठकों में स्थानीय सांसद और विधायक (या उनके प्रतिनिधि) को शामिल करने का निर्णय लिया है।

इससे:

  • योजनाओं की प्राथमिकता तय करने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ेगी
  • जमीनी जरूरतों के अनुरूप फैसले लिए जा सकेंगे
  • शहरी विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी

बजट सत्र में बनेगा कानून

सरकार इस संशोधन विधेयक को चालू बजट सत्र में ही विधानमंडल से पारित कराकर कानून का रूप देने की तैयारी में है। कानून लागू होते ही बिहार के शहरी निकायों में नई लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।

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